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गंगा में समाए तीन युवक : आदित्य का शव देख चीखकर बोले पिता, सांस चल रही है, फिर फूट-फूटकर रोए

Sat, 30 Mar 2024 04:41 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी

सार

शव से लिपटकर रोते समेय चीखकर बोले...सांस चल रही है, इसे अस्पताल ले चलो। लोग उनकी तसल्ली के लिए आदित्य के शव को अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पिता फूट-फूटकर रोने लगे।
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अभिषेक की मौत पर रोते बिलखते परिजन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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करेंटी घाट में दोस्तों संग गंगा में डूबे आदित्य का शव घटना के करीब चार घंटे बाद शाम चार बजे नदी से निकाला जा सका। जवान बेटे का शव देख बुजुर्ग पिता पिता वीरेंद्र जायसवाल बदहवास हो गए। शव से लिपटकर रोते समेय चीखकर बोले...सांस चल रही है, इसे अस्पताल ले चलो। लोग उनकी तसल्ली के लिए आदित्य के शव को अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पिता फूट-फूटकर रोने लगे।

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वीरेंद्र को ढांढस बंधाने वालों की भी आंखें नम थी। आदित्य उनकी इकलौती संतान था। वह उसे अफसर बनाना चाहते थे, लेकिन इस हादसे ने उनका सपना तोड़ दियाा। घाट पर रोते हुए वह बोले, जब वह छह माह का था, तभी मां चल बसीं। किसी तरह उसे पाला था। पिता ही नहीं मां के हिस्से का भी प्यार दिया। गांव में छोटी सी परचून की दुकान चलाने वाले वीरेंद्र रोते हुए कहते रहे कि अब किसे अफसर बनाएंगे। घर वालों ने बताया कि आदित्य सयारां स्थित एक डिग्री कॉलेज से बी.कॉम कर रहा था।

गंगा नहाने के लिए शुभम ने रेल टिकट करा लिया था निरस्त

बसावनपुर गांव का शुभम पाल चंडीगढ़ में निजी नौकरी करता है। पिता आत्माराम ने बताया कि 28 को शुभम चंडीगढ़ जाने वाला था। उसने रेल टिकट भी बुक करा लिया था, लेकिन दोस्तों संग गंगा नहाने के कार्यक्रम की वजह से उसने टिकट निरस्त कराकर 30 मार्च के लिए फिर से आरक्षण कराया था। संवाद

बीएससी कर रहा था अभिषेक

कल्यानपुर। बम्हरौली निवासी अभिषेक भी बीएससी का छात्र था। अभिषेक के घरवाले गंगा किनारे घटना के बाद पहुंचे तो पूरे समय मौजूद रहे। वे पुलिस औप गोताखोरों पर टकटकी लगाए बैठे थे। देर शाम तक जब अभिषेक का कुछ पता नहीं चला तो वे मायूस हो गए। घर वाले कहते रहे कि वह आ जाएगा। पुलिस और गोताखोरों से पूछने पर उन्हें अभिषेक के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।
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शशांक की आंखों के सामने ही गंगा में समा गए जिगरी यार

तीन दोस्तों को आंखों के सामने गंगा में समाते हुए देखने वाला शशांक बदहवास है। उसे इस बात का मलाल है कि सब कुछ उसकी आंखों के सामने हुआ और वह कुछ नहीं कर सका। घटना के बारे में पूछने पर शशांक की आंखों में आंसू आ जाते हैं।

शशांक बताता है कि मंजर काफी भयावह था। शुभम जब डूबने लगा तो वह बचाव-बचाव चिल्ला रहा था। अभिषेक व आदित्य उसे बचाने के लिए आगे बढ़े तो शुभम ने उन्हें भी अपनी ओर खींच लिया। इसके बाद सभी डूबने लगे। पहले उसने बचाने के लिए कदम बढ़ाए, लेकिन यह सोचकर रुक गया कि जब तीन लोग डूब चुके हैं तो उसकी जान को भी खतरा हो सकता है।

वह नदी से बाहर आकर मदद की गुुहार लगाने लगा। घाट पर कुछ नाविक मदद के लिए आगे आए, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। नदी से आदित्य का शव तो निकाल लिया गया, लेकिन अभिषेक व शुभम का पता नहीं चला। परिवार के लोग गंगा किनारे बैठकर रोते रहे।

हादसे के बाद से करेंटी घाट से लेकर गंगा में समाए युवकों के बम्हरौली, पल्टीपुर और बसवनपुर गांव तक हर तरफ चीत्कार मची हुई है। एसडीएम सिराथू महेंद्र श्रीवास्तव ने आश्वासन दिया कि एसडीआरएफ की टीम को खबर कर गई है। बचाव कार्य जारी रहेगा। वहीं, दूसरी तरफ नदी में डूबे युवकों के गांव में भी मातम है।
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