Three prisoners employed by money received from jail
- फोटो : KAUSHAMBI
अदालत से दोषमुक्त होने पर मिले पैसे से रोजगार करेंगे तीन बंदी
जेल में बिताई गई अवधि के दौरान किए श्रम का मिला मेहनताना
जिलाधिकारी ने बंदियों को चेक देकर की सुनहरे भविष्य की कामना की
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। दहेज हत्या समेत अन्य मामलों में जेल में निरुद्घ बंदियों को दोषमुक्त होने के बाद जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने कारागार में बिताई गई अवधि के दौरान किए गए श्रम का पारिश्रमिक देकर विदा किया। बंदियों ने इस रकम से नया व्यापार करने की सौगंध ली।
जिला कारागार टेवां से सोमवार को तीन बंदी रिहा किए गए है। सैनी कोतवाली के केन गांव निवासी राजेंद्र सिंह उर्फ चुक्की को दहेज हत्या के मामले में 25 अप्रैल 2009 को जेल भेजा गया था। 29 जनवरी 2018 को वह दोषमुक्त किया गया था। राजेंद्र को हाईकोर्ट ने दोषमुक्त किया। इस दौरान जेल में बिताई गई अवधि के दौरान राजेंद्र ने करीब 53753 रुपये बतौर पारिश्रमिक एकत्र किया था। जेल में उसका आचरण भी अच्छा था। इसी तरह सैनी के ही कोरियो निवासी बुद्धिमान सिंह चार मई 2011 में जेल भेजा गया था। बुद्धिमान ने जेल में करीब 24675 रुपये कमाए। इसी तरह करनपुर निवासी नईम 31 दिसंबर 2012 को जेल भेजा गया था। उसने भी जेल के बंदियों का बाल काटकर तकरीबन 22416 रुपये एकत्र किए। इन सभी बंदियों को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया है। सोमवार को सभी ने जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा के सामने परेड की। बंदियों को प्रशासन की तरफ से उनके पारिश्रमिक का चेक प्रदान किया गया। बुद्धिमान सिंह और राजेंद्र ने कहा कि इन पैसों से वह खेती कर अपनी आय दोगुनी करेंगे। वहीं नईम का कहना था कि वह पहले की तरह नाई की दुकान खोलेगा। जेल जाने से पहले नईम सैलून संचालक था। इस मौके पर एडीएम मनोज, जेलर बीएस मुकुंद आदि मौजूद रहे।