सऊदी अरब से लौटे युवक को लखनऊ एयरपोर्ट से लेने गए छोटे भाई व पड़ोसी समेत तीन लोगों की सड़क हादसे में मौत हो गई। जबकि वाहन चालक राजधानी के अस्पताल में जिंदगी-मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। देर रात हादसे की जानकारी मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। परिजन और पड़ोसी तीनों शवों को लेने के लिए बुधवार सुबह लखनऊ रवाना हो गए हैं।
सैनी कोतवाली के मौहारी बाग मजरा गोविंदपुर गोरियों गांव निवासी अनवारूल हक (40) पुत्र मुख्तार अहमद पिछले चार साल से सऊदी के रियाद शहर में रहकर सिलाई का काम करता था। मार्च से लागू लॉकडाउन के कारण वह घर नहीं लौट पाया। अनवारूल दुबई से घर के लिए निकला और मंगलवार देर रात उसकी फ्लाइट लखनऊ एयरपोर्ट पर आनी थी। इसकी जानकारी होने पर अनवारूल को लेने के लिए गांव से उसका सगा भाई अकबारूल हक (38) अपने पड़ोसी हलीम (40) पुत्र अब्दुल खालिक के साथ वसीम (30) की बोलेरो से लेकर लखनऊ रवाना हुआ।
रात करीब दस बजे फ्लाइट लखनऊ पहुंची। वहां जांच कराने के बाद अनवारूल अपने भाई व पड़ोसी के साथ बोलेरो पर सवार होकर घर के लिए निकला। जैसे ही चारों सरोजनी नायडू कोतवाली क्षेत्र के हज हाउस के पास पहुंचे तभी सड़क पर अचानक मवेशी आ गया। मवेशी को बचाने के चक्कर में चालक वसीम वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। इसके बाद अनियंत्रित हुई बोलेरो पलट गई। घटना में अनवारूल, उसका भाई अकबारूल व पड़ोसी हलीम की मौके पर ही मौत हो गई।
हादसा देख स्थानीय लोगों ने पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा की वसीम की सांसे चल रही हैं तो उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। होश आने पर वसीम ने ही साथ रहे लोगों के बारे जानकारी दी। इसके बाद लखनऊ पुलिस ने परिजनों से फोन कर दुर्घटना की जानकारी दी। तीन लोगों की मौत पर परिजनों में कोहराम मच गया। जानकारी होते ही परिजन और पड़ोसी शव लेने के लिए लखनऊ रवाना हो गए हैं।
चार साल बाद वतन लौटा, नसीब नहीं हुआ परिवार से मिलना
मौहारी बाग का रहने वाला तीन भाइयों में सबसे बड़ा अनवारूल चार साल पहले सऊदी गया था। गांव में दूसरे नंबर का भाई अकबारूल रहकर पिता मुख्तार अहमद के साथ खेती-बाड़ी में हाथ बंटाता था। जबकि सबसे छोटा जियाउल राजस्थान में नौकरी करता था। कोरोना काल से ही अनवारूल घर आने के लिए बेहद परेशान था। फ्लाइट बंद होने के कारण उसका संपर्क परिवार के साथ सिर्फ फोन पर था। किसी तरह वतन आया भी तो परिवार से मिलने के पहले उसकी मौत हो गई।
मौहारी बाग निवासी मुख्तार अहमद किसानी करते हैं। उनके तीन बेटों में सबसे बड़ा अनवारूल सिलाई का काम करता था। तीन बार वह सऊदी जाकर काम कर चुका था। चार साल पहले भी वह सऊदी के रियाद गया। घर में उसकी पत्नी शमा परवीन दो बेटियों शबा सिद्दीकी व आफरीन के साथ रहती है। दूसरे नंबर का बेटा अकबारूल पिता के साथ खेती में हाथ बटाता था। अकबारूल के अलावा उसकी पत्नी शबनम व बेटा यूसुफ और बेटी उमैरा हैं। जबकि मुख्तार का सबसे छोटा बेटा जियाउल राजस्थान में काम करता है।
परिवार वालों की मानें तो मंगलवार को जब अनवारूल के आने की जानकारी मिली तो परिवार में खुशी का ठिकाना नहीं था। अनवारूल का छोटा भाई अकबारूल उसे लेने के लिए लखनऊ तक गया। परिवार के लोग पल-पल फोन कर अनवारूल के घर आने की जानकारी ले रहे थे।
इस बीच रात करीब 12 बजे लखनऊ पुलिस के एक फोन से परिवार में कोहराम मचा गया। जिस घर में बड़े बेटे के आने का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था वहां पर अर्थी आने की बाट जोही जाने लगी। अनवारूल के घर रोना-पीटना सुन उसे लेने गए हलीम के परिजन पहुंचे तो उन्हें भी दुर्घटना की जानकारी हुई। इसके बाद से ही पूरे गांव में सन्नाटे को चीरती हुई चीख-पुकार की आवाजें गूंजने लगीं। शाम तक तीनों शव गांव नहीं पहुंचे थे।
Three including a dead brother in Lucknow died in road accident, one serious- फोटो : KAUSHAMBI
Three including a dead brother in Lucknow died in road accident, one serious- फोटो : KAUSHAMBI