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119 बंदियों को जेल में करानी होगी आमद

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अक्तूबर के पहले पखवाड़े में जिले के 119 बंदी और कैदियों को जेल में आमद करानी है। कोरोना संक्रमण से बचाव और जेलों में भीड़ कम करने के लिए इन्हें उच्च न्यायालय के आदेश पर पैरोल मिली थी। इस कारण ये बंदी और कैदी छह-सात माह अपने परिवार के साथ रहे।
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कोरोना संक्रमण को देखते हुए उच्च न्यायालय के आदेेश पर सात साल या उससे कम सजा में जेल में बंद विचाराधीन बंदी व कैदियों को पैरोल पर छोड़ने का आदेश दिया था। इस पर जिला कारागार से 19 कैदी व 100 विचाराधीन बंदियों को अप्रैल व मई में पैरोल देकर छोड़ा गया था।
वर्षों से सलाखों के पीछे रहे बंदियो और कैदियों को 6-7 माह परिवार के साथ रहने का मौका मिला। इस दौरान बंदी और कैदियों ने अपनी दिनचर्या नहीं बदली। सुबह जल्दी उठकर कुछ बंदियों ने खेतों में काम किया तो कुछ मजदूरी कर परिवार की जीविकोपार्जन का सहारा बने।
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पैरोल की समय सीमा खत्म होता देख अब इनमें बेचैनी बढ़ गई है। उन्हें फिर से परिवार से दूर रहने का डर सताने लगा है। जेल अधीक्षक बीएस मुकुंद ने बताया कि इस बार फिलहाल न्यायालय की ओर से पैरोल की तारीख नहीं बढ़ाई गई है। बंदियों को नवंबर के पहले पखवाड़े में जेल में आमद कराने का आदेश जारी किया गया है। नियम के तहत जेल में आमद नहीं कराने पर संबंधित थाने की पुलिस के माध्यम से जेल लाया जाएगा।
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