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कौशाम्बी में मौन हुई मौन पालन योजना

Thu, 09 Apr 2015 12:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
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मंझनपुर। औद्यानिक मिशन की मौन पालन योजना कागजों में मौन होकर रह गई है। कई ऐसे लोगों के नाम मधुमक्खी पालन में शामिल हैं। जिन्हें चयन और मौन पालन की जानकारी ही नहीं है। उन्हें मधुमक्खी पालन के बाक्स तक नहीं उपलब्ध कराए गए हैं। जबकि अभिलेखों में मौन पालन का स्थलीय सत्यापन भी हो चुका है। मामले में पूछने पर जिला उद्यान अधिकारी ने दावा किया कि मौन पालन में कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है।
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जिला उद्यान विभाग में औद्यानिक मिशन योजना के तहत संचालित योजनाओं में जमकर खेल किया जा रहा है। इसी में मौन पालन योजना भी शामिल है। देखें तो वित्तीय वर्ष 2014-15 में आठ किसानों का चयन मौन पालन के लिए किया जाना था। प्रत्येक किसान को मौन पालन के लिए 88 हजार रुपये का अनुदान मिलता है। यह अनुदान की राशि किसान से मौन पालन के लिए खरीदे जाने वाले सामानों का बिल बाउचर लेने के बाद ही उन्हें दी जाती है। सूत्रों की मानें तो जिले में मौन पालन के लाभार्थियों के चयन में भी मनमानी की गई है। एक ही ब्लाक के छह लाभार्थियों का चयन कर लिया गया है। पर, इसमें सबसे बड़ा आश्चर्य यह है कि चयनित किसानों में कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें पता तक नहीं है कि वह मौन पालन कर रहे हैं।

ऐसे में चर्चा है कि फर्जी किसानों का नाम मौन पालन में दर्ज करके उनके नाम ही अनुदान राशि डकार ली गई है। हालांकि इसे मानने के लिए जिला उद्यान अधिकारी राजी नहीं हैं। जिला उद्यान अधिकारी रामसिंह यादव का कहना है कि किसानों को अनुदान की रकम उनके बैंक खाते में भेजी जाती है। वहीं उनका दावा है कि जितने भी लाभार्थी हैं। सभी मौन पालन कर भी रहे हैं। हालांकि लाभार्थियों की सूची में शामिल सिराथू तहसील के ख्वचकीमई गांव के लाभार्थी संतलाल के बगीचे अथवा घर के आसपास कहीं भी मौन पालन के बाक्स नहीं मिले। गांववालों को भी नहीं पता है कि संतलाल मौन पालन करता है।
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जिला औद्यानिक मिशन योजना के तहत मौन पालन के 400 मौन गृह खरीदे जाने का लक्ष्य था। पर विभाग महज 250 मौन बाक्स में ही मौन पालन करा रहा है। एक बाक्स पर तीन हजार रुपये का व्यय किया जाता है। इसके अलावा फ्रेम आदि में अनुदान की रकम खर्च की जाती है। मौन पालन के लिए प्रत्येक लाभार्थी के पास 50 मौन बाक्स, 08 मधुमक्खी फ्रेम, 01 निष्कासन यंत्र, 01 स्टील कंटेनर, 50 स्टैंड, 200 पयालियां, 05 मोमी छत्तादार किलोग्राम, 02 मुंह रक्षक जाली, 02 दास्ताना, 05 रानी अवरोधक जाली, 01 बकछूट थैला, 01 हाइब टूल, 02 न्यूक्लियस हाइब होना चाहिए पर यह पूरा सामान किसी भी किसान के पास नहीं है।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक लाभार्थी को दी जाने वाली रकम डकारने के लिए विभागीय अफसर, कर्मियों का अपना फार्मूला है। इस फामूले के तहत किसानों को अनुदान की रकम देने से पहले उनसे ब्लैंक चेक हस्ताक्षर कराकर ले ली जाती है। बाद में आधी से ज्यादा रकम इसी ब्लैंक चेक के माध्यम से निकाल ली जाती है। इसके बाद बची हुई रकम किसानों को उनका अनुदान बताकर बैंक से निकालने को कह दिया जाता है। किसानों को कितना अनुदान योजना के तहत मिलना है। इसकी उन्हें पहले जानकारी नहीं दी जाती है। बगैर मौन पालन किए 10-20 हजार रुपये पा जाने से किसान भी गदगद रहते हैं। सूत्रों की मानें ने इसी फार्मूले से सभी योजनाआें में खेल हो रहा है। उधर, सत्यापन के दौरान एक स्थान पर मौन बाक्स रखकर फोटोग्राफ्स कराकर उसी फोटो को सत्यापन के नाम पर उच्चाधिकारियों को भेज दिया जाता है।
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