मंझनपुर। गर्मी आते ही गांव-गांव आग लगने की घटनाएं होने लगी हैं। अप्रैल के पहले हफ्ते ही घर, खेत-खलिहान जलने की करीब दर्जनभर घटनाएं हो चुकी हैं। शनिवार को ही खेत जलने की चार घटनाएं हुईं। ज्यादातर पीड़ितों का आरोप है कि सूचना के बाद भी दमकलकर्मी आग बुझाने नहीं पहुंचे। मामले में मुख्य अग्निशमन अधिकारी का कहना है कि विभाग के पास पानी, उपकरण और कर्मचारियों की किल्लत है। इससे सूचना के बाद भी विभागीय कर्मचारी अपनी ड्यूटी पूरी तरह से नहीं निभा पा रहे हैं। प्रत्येक माह उच्चाधिकारियों को मांगपत्र भेजा जाता है, लेकिन अफसर बेफिक्र बने हैं।
कौशाम्बी के 440 गांवों में आग लगने की घटनाओं पर काबू पाने के लिए मंझनपुर, सिराथू और पश्चिमशरीरा में फायर स्टेशन हैं। जिले के तीनों फायर स्टेशन कर्मचारी, पानी, उपकरण की समस्याओं से जूझ रहे हैं। मंझनपुर के ही स्टेशन पर मोटर फायर इंजन, रेस्क्यू व्हीकिल, हाईप्रेशर डिस्चार्ज मशीन आदि उपकरण नहीं हैं। स्टेशन पर दमकल में पानी भरने का इंतजाम भी सिफर है।
अफसर से लेकर फायरमैन तक की कमी है। कर्मचारी और संसाधनों की कमी के कारण ही आग लगने की ज्यादातर घटनाओं में फायर ब्रिगेडकर्मी सूचना के बाद भी नहीं पहुंच पाते। खुद दमकल विभाग के अफसर बताते हैं कि जिले में प्रतिवर्ष आग लगने की घटनाओं में तीन करोड़ से भी ज्यादा की संपत्ति नष्ट हो रही है। पिछले साल ही गर्मी के मौसम में आग लगने की 100 से अधिक घटनाएं हुई हैं। इससे करीब दो से तीन करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। वहीं इसी अप्रैल के पहले 10 दिनों में ही दर्जनभर से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं।
अभी शनिवार को ही चायल तहसील के इमली गांव, सुधवर और जनका के दो किसानों के खेत में आग लगने से करीब चार बीघा की फसल खाक हो गई थी। वहीं सिराथू के धुमाई गांव में भी लगी आग से तीन बीघा फसल जल गई। मामले में प्रभारी मुख्य अग्निशमन अधिकारी बाल कुमार शुक्ल का कहना है कि मोटर फायर इंजन, जेटपंप, हाईप्रेशर डिस्चार्ज मशीन और कर्मचारियों की मांग का पत्र माहवार रिपोर्ट के साथ भेजा जाता है, लेकिन दमकल विभाग की बदहाली पर सरकार ही ध्यान नहीं दे रही है।