करारी। मंझनपुर ब्लॉक क्षेत्र के कई गांवों में बारिश के मौसम में 20 फीसदी से अधिक हैंडपंपों ने पानी उगलना बंद कर दिया है। इसकी खास वजह अच्छी बारिश के अभाव में धान की सिंचाई के लिए बराबर चल रहे सबमर्सिबल बताई जा रही है।
जलजीवन मिशन के तहत भले ही गांव-गांव नलकूप की बोरिंग व पाइपलाइन बिछाकर हर घर नल से जल पहुंचाया जा रहा हो लेकिन कार्यदायी संस्था की सुस्ती के कारण अधिकतर गांवों में परियोजना अधूरी पड़ी है। ऐसे में मंझनपुर ब्लॉक क्षेत्र के ज्यादातर गांव के ग्रामीण पेयजल के लिए सरकारी हैंडपंप पर ही आश्रित हैं।
इधर महीने भर से भैला मकदूमपुर, गुवारा तैयबपुर, पिपरकुंडी सहित आसपास के कई गांवों के हैंडपंपों ने पानी उगलना बंद कर दिया है। ग्रामीणों की मानें तो भूगर्भ जलस्तर दस फीट नीचे खिसक गया है। भैला मकदूमपुर गांव में लगे 104 हैंडपंप में से 25, पिपरकुंडी में 65 में से 20, गुवारा तैयबपुर गांव में 125 में से 40, सैंबसा गांव में 40 में 10 सरकारी हैंडपंपों ने पानी छोड़ दिया है।
क्षेत्र के दिनेश, राजाराम और सकठू आदि ग्रामीणों ने बताया कि इस साल अच्छी बरसात नहीं होने से धान की रोपाई के लिए सबमर्सिबल का सहारा लेना पड़ रहा है। बिजली आने पर सबमर्सिबल बराबर चलता रहता है। इसलिए भूगर्भ जलस्तर नीचे भाग रहा है।
नहरों में पानी नहीं छोड़ने से भी पड़ रहा असर
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. मनोज सिंह ने बताया कि इस साल भीषण गर्मी के बाद अच्छी बरसात होने की उम्मीद थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस समय तक न्यूनतम औसत वर्ष 184.8 मिमी तक हो जानी चाहिए थी लेकिन अब तक जिले में 158.3 मिमी ही बारिश हुई है। इसके अलावा नहरों में भी पानी नहीं छोड़ा गया है।
चंदा जुटाकर अतिरिक्त पाइप डलवा रहे ग्रामीण
जलस्तर नीचे जाने से हैंडपंप से पानी नहीं निकल रहा है। जो लोग निजी हैंडपंप लगवाए हैं, वह तो 10 फीट पाइप डलवाकर किसी तरह से काम चला रहे हैं। सर्वाधिक समस्या सरकारी हैंडपंप बनवाने में हो रही है। आरोप है कि ग्राम प्रधान पाइप सरिया देने के बाद हाथ खडे कर दे रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण चंदा एकत्र कर हैंडपंप बनवा रहे हैं।
मेरे घर के सामने लगा सरकारी हैंडपंप में पखवाड़े भर से पानी नहीं निकल रहा है। मिस्त्री ने बताया कि भूगर्भ जलस्तर नीचे चला गया है। लिहाजा 10 फीट का एक पाइप और डालना पड़ेगा। -राजू तिवारी,पिपरकुंडी
पखवाड़े भर से घर के पास लगा हैंडपंप पानी नहीं दे रहा है। प्रधान ने सामान देने से हाथ खडे कर दिए हैं। एक पाइप और सरिया डालने के लिए चंदा इकट्ठा किया जा रहा है।-राम चंद्र, भैला मकदूमपुर
जिले के आठ में दो ब्लॉक मूरतगंज और चायल डार्क जोन में हैं। चार ब्लॉक मंझनपुर, सिराथू, नेवादा और कड़ा सेमी क्रिटिकल श्रेणी में हैं। सिर्फ कौशाम्बी और सरसवां ब्लॉक क्षेत्र ही सेफ जोन में हैं। -रविशंकर पटेल, हाइड्रोलॉजिस्ट, भूगर्भ जल विभाग