संदिग्ध परिस्थितियों में लगी आग में तीन बच्चों समेत खाक हुए भट्ठा मजदूर के परिजन और ग्रामीण आर्थिक मदद के लिए शनिवार को लाशें लेकर घर के सामने धरने पर दिनभर बैठे रहे। सूचना पर सिराथू विधायक के साथ मौके पर पहुंचे एडीएम ने 4.50 लाख रुपये का चेक पीड़ित परिवार को दिया। इसके बाद ही लोग शवों के अंतिम संस्कार को तैयार हुए। शाम को अफसरों की मौजूदगी में चार शवों का अंतिम संस्कार किया गया।
बता दें कि करारी के पिपरकुंडी गांव का रहने वाले राजेंद्र प्रसाद (38) गुबारा तैयबपुर (सनईपर) ईंट भट्ठे में काम करता था। वहीं झोपड़ी बनाकर वह पत्नी और 4 बच्चों के साथ रहता भी था। बृहस्पतिवार की रात अचानक उसकी झोपड़ी में आग लग गई। लपटों की जद में आने से राजेंद्र प्रसाद के साथ ही उसकी बेटी हीरामनि (10), बेटे लालाभैया (6) और छोटू (4) की मौत हो गई थी। जबकि पत्नी राजरानी उर्फ सुदामा देवी डेढ़ साल के दुधमुंहे बच्चे समेत भागकर किसी तरह से अपनी जान बचाई थी। बताया जाता है कि शुक्रवार की सुबह घटनास्थल पर पहुंचे तहसीलदार ने एडीएम से बात करने के बाद प्रति मृतक के हिसाब से डेढ़-डेढ़ लाख रुपये आर्थिक मदद की घोषणा की थी।
शनिवार को इसी आर्थिक मदद को दिए जाने की मांग करते हुए गांववाले मृतक की पत्नी, भाई और पिता के साथ शवों को लेकर गांव में ही धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों ने बताया कि इस गरीब परिवार के पास अंतिम संस्कार के लिए भी पैसा नहीं है। ऐसे में तत्काल आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जाए। लाशें लेकर ग्रामीणों के धरने पर बैठने की सूचना पर दिन में करीब दो बजे सिराथू विधायक वाचस्पति, एडीएम राम सूरत, एसडीएम मंझनपुर नरेंद्र सिंह, तहसीलदार आदि कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचे। एडीएम ने विधायक के हाथ 4.50 लाख रुपये का चेक पीड़ित परिवार को देकर उन्हें शांत कराया। चेक मिलने के बाद ही गांववालों ने अफसरों की मौजूदगी में गांव के बाहर सभी 4 शवों का अंतिम संस्कार किया। इस मौके पर ग्राम प्रधान शीतला प्रसाद मौर्य, सपा जिलाध्यक्ष अशोक यादव, भाजपा नेत्री पुष्पा देवी, उदयन सिंह, बसपा नेता राम लखन भारतीय आदि भी मौजूद रहे।