तहसील परिसर में 16 वर्ष पहले बना राजस्व बंदी गृह जर्जर हो गया है। ऐसे में मुल्जिमों को 15 किलोमीटर दूर जिला जेल भेजा जाता है। बंदियों के घरवालों को मिलाई करने में दिक्कतें होती हैं। अधिकारियों का कहना है कि मरम्मत के लिए बजट की मांग करने के बाद भी नहीं दिया गया है।
कास्तकारी की ओर से भूमि विकास, कोऑपरेटिव बैंक से ऋण व अन्य राजस्व कर न जमा करने पर रकम वसूली को लेकर विभाग की तरफ से आरसी जारी की जाती है। इसके बाद भी पैसा न देने पर नोटिस देकर एक महीने का समय दिया जाता है। इसके बावजूद बकाया ऋण न जमा करने पर बकायेदार को 14 दिन के लिए हिरासत में लेकर बंदी गृह में भेजने का प्रावधान है। जिसे लेकर जिले के तीन तहसीलों में राजस्व बंदी गृह बनाए गए हैं।
सिराथू नई तहसील का वर्ष 2019 में निर्माण कराया गया था जिसमें एसडीएम, तहसीलदार सहित अन्य अधिकारियों के दफ्तर, न्यायालय, लिपिक कक्ष व सभागार के साथ बंदी गृह का निर्माण हुआ था। इसमें शौचालय स्नान की व्यवस्था के साथ भोजन का इंतजाम किया गया था।
रखरखाव के अभाव में लाखों की लागत से बना बंदी गृह जर्जर हो गया है। ऐसे में मुल्जिमों को 15 किलोमीटर दूर स्थित जिला जेल टिकरी भेजा जाता है। क्षेत्र से दूरी अधिक होने के चलते बंदी के परिजनों को मिलाई करने में दिक्कत होती है।
नाजिर योगेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि डेढ़ साल से किसी भी बकायेदार को नहीं बंद किया गया है। इससे पहले 10 से 12 मुल्जिमों को जिला जेल भेजा गया था, जिसमें 14 दिन के लिए आठ सौ रुपये प्रति मुल्जिम के हिसाब से भोजन खर्च जेल प्रशासन को दिया जाता है।
बंदी ग्रह की मरम्मत के लिए बजट की मांग को लेकर उच्च अधिकारियों को पत्राचार किया गया है। धनराशि न मिलने से कायाकल्प का कार्य नहीं हो सका है। भवन की साफ-सफाई के लिए कर्मचारियों को लगाया जाएगा। -अनंत राम अग्रवाल, तहसीलदार, सिराथू