मंझनपुर (ब्यूरो)। मार्च-अप्रैल में कहर बरपाने वाला मौसम अब भी किसानों को मिटाने पर जुटा है। बेमौसम की बारिश और ओलावृष्टि से बची-खुची फसलें शनिवार की रात चली तेज हवाओं में बर्बाद हो गई। 50 किलोमीटर से भी ज्यादा तेज रफ्तार से चली धूलभरी आंधी किसानों के खेतों में कटी पड़ी गेहूं की फसलें उड़ गई।
चायल के किसान शिवबाबू, मोहनलाल, मोहम्मद मियां, भैयालाल यादव, रामकृपाल, चलौली गांव के रामसिंह, दीवान सिंह, आनंद सिंह, सिंहपुर गांव के ओमप्रकाश त्रिपाठी, अर्जुन सिंह, बब्बू सिंह, रामलाल, चौराडीह के अनिल त्रिपाठी, उदय पांडेय, करन सिंह, श्याम बिहारी आदि ने बताया कि उनकी गेहूं की फसल कटकर खेत में पड़ी थी। बोझ नहीं बंधे थे। रात आई आंधी में आधी से ज्यादा फसल दूसरे के खेत में उड़कर चली गई। अन्नदाताओं का कहना है कि बेमौसम की बारिश से पहले ही उनका सबकुछ लुट चुका है। शनिवार की रात आई आंधी बर्बाद हुई फसलों पर प्रकृति की एक और मार है। किसानों का कहना है कि इस साल तो भगवान की ऐसी मार पड़ रही है। जिससे परिवार के लिए निवाले का इंतजाम भी मुश्किल है।
मौसम की बारिश गेहूं, सरसों, चना, अरहर आदि फसलें गंवाने वाले किसानों की आम की फसल पर भी शनिवार की रात मौसम का कहर टूटा। तेज आंधी चलने से आम के पेड़ों में लगे टिकोर (छोटे फल) टूटकर गिर गए। सुबह किसान बागों की ओर गए, तो जमीन में छोटे-छोटे बिछे पड़े थे। यह देख अन्नदाताओं के होश उड़े हुए हैं। चायल के रहने वाले सईदुर्रहमान, मोहम्मद असद, चलौली गांव के मैदान सिंह आदि ने बताया कि रात आई आंधी में पेड़ों में लगे आधे से अधिक फल गिर गए हैं। इन तीनों किसानों ने बताया कि उनके पास दो-दो बीघे की आम की बाग है। फल गिरने से उनकी यह कमाई भी मिट्टी में मिल गई।
बेमौसम की बारिश, ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलों के सदमे से किसानों की सांसें थमने लगी हैं। मौसम की मार से अन्नदातों की 70 फीसदी से अधिक फसल बर्बाद हो चुकी है। फिर भी मौसम का मिजाज ठीक नहीं है। शनिवार की शाम तेज आंधी चली थी। रविवार को भी दिनभर धूप नहीं खिली। आसमान में काले बादल मौजूद हैं। रुक-रुककर बूंदाबांदी हो रही है। मौसम का यह रूप देख अन्नदाता डरे हैं। सहमे किसान खेत में बर्बाद होकर पड़ी फसल इस नीयत से समेटने में जुटे हैं कि शायद परिवार के लिए एकाध महीने के ही निवाले का इंतजाम हो जाए।
मौसम की मार से किसानों की गेहूं समेत रबी के सीजन की ज्यादातर फसलें चौपट हो चुकी हैं। फसल बर्बाद होने के सदमे में जान गंवाने वाले मखऊपुर गांव के किसान त्रिलोक सिंह की फसल की खुद डीएम ने अपने सामने क्राप कटिंग कराकर जायजा लिया था। तब करीब 70 फीसदी फसल की बर्बादी सामने आई थी। उसी दिन डीएम राजमणि यादव ने 68 अफसरों की टीम लगाकर 24 घंटे के भीतर मौसम की मार से बर्बाद हुई फसलों का सर्वे करके रिपोर्ट मांगी थी। 11 अप्रैल की शाम तक रिपोर्ट देनी थी। पर, 12 अप्रैल की शाम तक भी सर्वे का काम जिम्मेदार पूरा नहीं कर सके थे।
वहीं सबसे बड़ी लापरवाही यह है कि सर्वे के लिए अफसर-कर्मी किसानों के खेतों तक जा ही नहीं रहे हैं। कौशाम्बी ब्लाक के हिसामबाद गांव के मसुरियादीन, बसंतलाल, गढ़वा गांव के गया प्रसाद, अमरनाथ तिवारी, आमाकुंआ गांव के चंदीलाल प्रजापति, इटैला गांव के मनोज कुमार, चरवा के रवींद्र त्रिपाठी, दिलीप कुमार, अयूब खान, मैकूलाल, शिवप्रसाद, मंझनपुर ब्लाक के सेसा गांव के राजेंद्र सिंह, गुलामीपुर के भोला यादव, गौरीशंकर, मुकीमपुर गांव के बहादुर सरोज आदि ने बताया कि अब तक उनके खेत की जांच करने कोई भी अधिकारी कर्मचारी नहीं आया है।
किसानों ने बताया कि जांच के लिए अब तक उन लोगों ने बर्बाद हुई फसल खेतों में ही छोड़ रखी थी। पर, आंधी और बूंदाबांदी देख अब सर्वे कर्मी के आने का इंतजार छोड़कर वे बची-खुची फसल समेटने में ही अपनी भलाई समझ रहे हैं।