मंझनपुर। एसटीएफ ने बुधवार को शातिर बजरंगी और उसके साथी की गिरफ्तारी की है। इसके बाद एक बार फिर से जनपद में फर्जी डिग्री का प्रयोग कर नौकरी करने की चर्चा हो रही है। हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि जिले में तैनात सभी फर्जी शिक्षकों की पहचान कर कार्रवाई की जा चुकी है, एक प्रकरण सीबीआई में लंबित है।
शिक्षा विभाग में फर्जी डिग्री का प्रयोग कर नौकरी करने वाले 32 शिक्षकों के खिलाफ बीएसए कार्यालय ने शिकायतों की जांच कर कार्रवाई की है। इनमें से 24 कथित शिक्षकों की सेवा समाप्त कर आहरित किए गए वेतन की भू-राजस्व की तरह वसूली के लिए आरसी भी जारी किया जा चुका है। आठ अन्य को न्यायालय के आदेश के बाद राहत दे दी गई है।
ये प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। मामले की पैरवी करने वाले शिक्षक अनिल सिंह ने बताया कि उनकी टीईटी की मार्कशीट को लेकर संदेह है। जबकि, पूर्व में सत्यापन हो चुका है। दोबारा सत्यापन होने से पहले विश्वविद्यालय में आग लग गई। इस कारण सत्यापन कार्य अटका है। विश्वविद्यालय की ओर से इसका जवाब लगाया जा चुका है, फैसले का इंतजार है।
शातिर बजरंगी का कौशाम्बी में था नेटवर्क
मंझनपुर। बजरंगी का शिक्षक फर्जीवाड़ा में बड़ा नेटवर्क था। जिले में नौकरी के दौरान वह यहां के शिक्षकों के करीब आ गया। इसके बाद बेरोजगार युवकों को नौकरी देने का सब्जबाग दिखाकर इनसे वसूली करने लगा। बजरंगी की गिरफ्तारी के बाद अब शिक्षकों के बीच खुलकर चर्चा हो रही है।
जिले में कुख्यात आरोपी बजरंगी लाल खुद जिले में फर्जी हाईस्कूल व इंटर की मार्कशीट के आधार पर नौकरी कर रहा था। पकड़ में आने के बाद उसने ऐसे लोगों को निशाना बनाया जो उसके झांसे में आ जाएं। शिक्षकों के बीच चर्चा है कि बजरंगी के नेटवर्क में जिले के करीब 35 शिक्षक थे। इनसे वह किसी न किसी बहाने धन उगाही करता था।
विभाग में फर्जी दस्तावेज पर नौकरी दिलाने के लिए बेरोजगार उसके संपर्क में थे। स्थानीय स्तर पर जिले में कुछ उसके एजेंट भी थे लेकिन, कार्रवाई के बाद से वह फरार था। सरसवां क्षेत्र का भोला बजरंगी नेटवर्क का सबसे शातिर खिलाड़ी माना जा रहा है। फिलहाल बजरंगी की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस उसके नेटवर्क को खंगालने का दावा कर रही है।
ऐसे होती थी वसूली
आरोपी बजरंगी व उसके साथी शिक्षक के खिलाफ जांच रिपोर्ट तैयार कर जिले में भेजते थे। इसके बाद उस शिक्षक से संपर्क कर नौकरी जाने का भय दिखाते थे। मिले दस्तावेज और एसटीएफ के नाम से शिक्षक भयभीत हो जाते थे। इसके बाद बजरंगी व उसके साथियोंं की मांग पूरी कर देते थे।
बीएसए कार्यालय को फिर मिले पत्र
बजरंगी का यह नेटवर्क लंबे समय से चल रहा है। करीब एक साल पहले पत्र भेजकर जिले से पांच शिक्षकों का डाटा मांगा गया था। बीएसए कार्यालय से इसका जवाब दो माह पहले दिया गया। एक सप्ताह पहले विभाग को दोबारा दो शिक्षकों के नाम से पत्र मिला है। विभाग इसका जवाब देता। इससे पहल बजरंगी और उसका साथी एसटीएफ के निशाने में आ गया। विभाग इन पत्रों को भी फर्जी मान रहा है।
बीएसए ने इस संबंध में सीधे जवाब तो नहीं दिया लेकिन, इतना जरूर कहा कि एसटीएफ ने शिक्षकों की जांच को लेकर किसी प्रकार के पत्राचार से इन्कार किया है। ऐसे में यह पत्र भी इसी दायरे में आ गए।
ओमप्रकाश की तलाश में गठित हुई टीम
एसटीएफ की ओर से कोतवाली में दर्ज मुकदमे की जांच कोतवाल संजय तिवारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ओमप्रकाश की तलाश में सर्विलांस टीम को सक्रिय किया गया है। इसके साथ जिले में बजरंगी के करीबियों की जानकारी की जा रही है।