कस्बे में शुक्रवार को महिला विचार-विमर्श समिति की महिलाओं ने अपनी दैनिक जिम्मेदारियों पर चर्चा करते हुए कहा कि एक महिला का पूरा दिन किसी मैनेजमेंट मॉडल से कम नहीं होता। महिलाएं घर, परिवार, समाज, दफ्तर और अन्य मोर्चों पर दायित्व निभाते हुए एक कुशल मैनेजर की भूमिका निभाती हैं।
महिलाओं ने माना कि उन्हें सम्मान देना और समाज में उनकी भूमिका को नए नजरिए से परिभाषित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज का विकास सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। यदि परिवार में ही महिलाओं या बच्चियों के प्रति भेदभाव किया जाता है, तो उस परिवार और समाज की खुशहाली की कल्पना नहीं की जा सकती। महिलाओं के बिना किसी भी समाज या परिवार की संरचना अधूरी है।
उन्होंने पुरुष प्रधान समाज से आग्रह किया कि महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार और सहजता अपनाई जाए। उन्होंने कहा कि भारत के संपूर्ण विकास की कल्पना तब तक नहीं की जा सकती जब तक महिला शक्ति आत्मनिर्भर और सक्षम न हो जाए।
समिति महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचारों की जानकारी लेकर उनकी समस्या का समाधान मौके पर जाकर करती है। महिलाओं को हर स्थिति में सहयोग देना ही समिति का उद्देश्य है।प्रीति नीरज कौशल, जिलाध्यक्ष
वर्तमान परिवेश में पुरुषों को अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है। तभी महिला उत्पीड़न की घटनाओं पर लगाम लग सकेगी। सुनैना केसरवानी, जिला उपाध्यक्ष
यदि घर में एक महिला पढ़ीलिखी हो तो पूरा परिवार शिक्षित और संस्कारी बन जाता है। जब तक महिला शक्ति सशक्त नहीं होगी तब तक देश विकास नहीं कर सकता।रिचा रस्तोगी, महासचिव
रिचा रस्तोगी, महासचिव। संवाद
रिचा रस्तोगी, महासचिव। संवाद
रिचा रस्तोगी, महासचिव। संवाद