केंद्रीय बजट को लेकर जिले के लोगों ने प्रक्रिया दी। लोगों ने कहा, किसान, मजदूर, कर्मचारी और मध्यम वर्ग को बजट ने निराश किया है। जिले के कर्मचारियों को इस बार आयकर में बड़ी छूट की उम्मीद थी। लेकिन, बजट में कोई ठोस राहत नहीं मिलने से वह खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। वहीं, पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को लेकर शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों को राहत की उम्मीद थी लेकिन निराशा हाथ लगी।
किराना दुकानदार संतोष कुमार ने बताया कि बजट में अमीरों के कारोबार, निवेश और घूमने-फिरने से जुड़े क्षेत्रों को कई तरह की छूटें दी गई हैं। जबकि बेरोजगारी से जूझ रहे युवाओं, मजदूरों और गरीबों की थाली खाली ही रह गई। मध्यम वर्ग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
किसान नेता नूरुल इस्लाम ने बताया कि खाद, बीज, पानी और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए किसान पहले से ही परेशान हैं। यहां के लोगों को विकास के लिए विशेष सहारे की दरकार थी। लेकिन, बजट में इसका अभाव दिखा। खेतों में उगीं सब्जियां और फल विदेशों तक भेजे जा रहे हैं पर कारोबार के नाम पर जिले को कुछ नहीं मिला।
कर्मचारियों को आयकर में छूट की उम्मीद थी। लेकिन कोई राहत नहीं मिली। पुराने स्लैब को ही लागू रखा गया है। पेंशन जैसे अहम विषयों पर चर्चा तक नहीं की गई। इससे शिक्षकों में निराशा है। - ओम दत्त त्रिपाठी, जिला संयोजक राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ
सरकार का बजट तो अमीरों के नाम रहा। इसमें गरीब, बेरोजगार, शोषित, वंचित वर्ग के लिए कोई राहत नहीं दिखी। किसान, मजदूर, श्रमिक, छोटे कारोबारी व दुकानदार ठगा महसूस कर रहे हैं। कौशाम्बी को इस बजट से राहत नहीं मिलने वाली है। - गौरव पांडेय, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
बजट से हर वर्ग को उम्मीद होती है कि कुछ न कुछ मिलेगा, लेकिन इसमें तो किसानों की बात ही नहीं हुई। जिले की सब्जियों को इन दिनों विदेश तक बेचा जा रहा है। ऐसे में इस कारोबार को बढ़ाने जैसे कदम पर भी सरकार का रुख साफ नहीं है। - अंकित राज सिंह, इंटरनेशनल एक्सपोर्ट
अंकित राज सिंह, इंटरनेशनल एक्सपोर्ट
अंकित राज सिंह, इंटरनेशनल एक्सपोर्ट