ब्रिटिश शासनकाल में बने सिराथू रेलवे स्टेशन के पैदल ओवरब्रिज की हालत अब बेहद जर्जर हो चुकी है। लगभग आठ दशक पुराने इस पुल से प्रतिदिन दो हजार से अधिक यात्री आवागमन करते हैं, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। पुल की सीढ़ियों का प्लास्टर जगह-जगह से टूटकर गिर चुका है और अंदर की सरिया बाहर दिखाई देने लगी है।
दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग पर स्थित सिराथू रेलवे स्टेशन का निर्माण वर्ष 1940 में हुआ था। उसी समय प्लेटफाॅर्म एक से दो और तीन तक जाने के लिए पैदल ओवरब्रिज बनाया गया था। वर्षों से मरम्मत न होने के कारण अब यह पुल काफी जर्जर हो चुका है। सुबह और शाम के समय संगम, चौरी-चौरा, मेमो पैसेंजर, इंटरसिटी और रीवां एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों का यहां ठहराव होता है, जिससे यात्रियों की भीड़ रहती है।
स्टेशन परिसर में सिग्नल रूम के पास स्थापित जीआरपी चौकी का भवन भी खस्ताहाल हो चुका है। भवन की दीवारों और छत में दरारें पड़ गई हैं और बारिश के समय पानी टपकता रहता है। इससे ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जर्जर हो चुके ओवरब्रिज से होकर रोजाना बड़ी संख्या में लोग गुजरते हैं। समय रहते रेलवे विभाग ने ध्यान नहीं दिया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। रावेंद्र कुमार पांडेय, पूर्व स्टेशन अधीक्षक
प्लेटफाॅर्म पर दूसरा पुल बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अब तक विभाग की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। किसान नेता अजय कुमार सोनी ने भी मांग की थी। -नुरुल इस्लाम, जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन
जर्जर ओवरब्रिज के स्थान पर नया पुल बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। निर्माण खंड की ओर से एस्टीमेट बनाकर भेज दिया गया है और स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। -गोपाल जी वर्मा, स्टेशन अधीक्षक
सिराथू रेलवे स्टेशन में प्लेटफार्म एक से दो बार तीन में जाने का जर्जर ओवर ब्रिज संवाद