महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत नेवादा ब्लॉक के गांवों में चल रहे कार्यों में मस्टररोल (डिजिटल उपस्थिति पंजिका) की निगरानी पूरी तरह से फेल हो चुकी है। हालत यह है कि पुरुषों के नाम पर महिलाओं की फोटो और महिलाओं के नाम पर पुरुषों की फोटो अपलोड कर हाजिरी दर्ज की जा रही है। ब्लॉक में अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी (एपीओ) की निगरानी के बाद भी मस्टररोल में गड़बड़ी की जा रही है।
दो फरवरी को मनरेगा के एनएमएमएस (नेशनल मोबाइल माॅनिटरिंग सिस्टम) पर अपलोड रिपोर्ट के आधार पर तीन ग्राम पंचायतों के मस्टररोल की जांच की गई। इस दौरान कई कार्यस्थलों पर महिलाओं की जगह पुरुषों की फोटो और पुरुषों की जगह महिलाओं की फोटो अपलोड की गई। संवाद
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केस- 1
ग्राम पंचायत इछना में पोतनिहा तालाब की खोदाई के काम के लिए निकाले गए मस्टररोल संख्या 5067 में एक महिला मजदूर तारा देवी की उपस्थिति दिखाई गई है, जबकि जियो टैगिंग के साथ अपलोड फोटो में चकरोड पर पुरुष खड़ा नजर आया। वहीं, पोतनिहा तालाब में खोदाई का कार्य चल रहा है या नहीं इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि कार्यस्थल के जिस फोटो को अपलोड किया गया है उसमें तालाब के बजाय चकरोड दिखाई दे रहा है।
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केस-
ग्राम पंचायत गोविंदपुर में सुनील सिंह के खेत से अर्जुन सिंह के खेत तक नाली की खोदाई के लिए छह मस्टररोल से 58 श्रमिकों की हाजिरी दर्ज की गई है। मस्टररोल संख्या 4957 जिसमें पांच पुरुष और पांच महिला दर्ज हैं, हाजिरी में एक पुरुष श्रमिक को अनुपस्थित भी दिखाया गया है। बावजूद इसके कार्यस्थल की जब फोटो अपलोड की गई तो महिला मजदूर नदारद दिखी और सिर्फ 10 पुरुष मजदूर ही नजर आए।
मस्टररोल रोल संख्या 5023 में छह पुरुष व तीन महिला और 5024 में आठ पुरुष व दो महिला मजदूरों को उपस्थित बताया गया है। लेकिन, कार्यस्थल की फोटो में एक भी महिला मजदूर नहीं दिखी। मस्टररोल संख्या 5022 में सात पुरुष और तीन महिला की जगह अपलोड फोटो में 11 पुरुष और एक महिला नजर आ रही है।
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केस-3
ग्राम पंचायत रामपुर में लोहार तालाब की खोदाई के लिए 10 मस्टररोल से 94 श्रमिकों को काम पर लगाया गया। सभी मस्टररोल में अलग-अलग महिला व पुरुष श्रमिकों की हाजिरी भरी गई है। लेकिन, अपलोड फोटो हाजिरी से मेल नहीं खा रही है। किसी फोटो में ज्यादातर महिलाएं और किसी में पुरुष ही नजर आ रहे हैं। जिस काम के लिए 94 श्रमिकों को उपस्थित दिखाया गया, वहां फोटो में इतनी संख्या से काफी कम श्रमिक दिखाई दिए।
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ब्लॉक में लंबे समय से जमे हुए हैं मनरेगा कर्मचारी
मनरेगा कार्यों के लिए लगे एपीओ, तकनीकी सहायक और कंप्यूटर ऑपरेटर समेत कई कर्मचारी लंबे समय से ब्लॉक में जमे हुए हैं। मनरेगा कामों में हो रही धांधली का एक कारण यह भी माना जा रहा है। जबकि शासन का स्पष्ट निर्देश है कि निश्चित समयावधि के बाद इन कर्मचारियों के तैनाती स्थल में परिवर्तन किए जाएं। लेकिन, आदेश को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
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मामले की जांच कराई जाएगी। इसमें जो भी कर्मचारी दोषी पाया जाता है उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उससे रिकवरी कराई जाएगी। संजय कुमार गुप्ता, बीडीओ नेवादा