रिहाई के बाद जिला जेल के बाद परिजनों के साथ खड़ा लखन लाल। स्रोत: विभाग
जेल में उम्र तो बीत ही गई, लेकिन इज्जत के साथ जिंदगी के अंतिम दिन गुजरना 103 साल के लखन लाल के नसीब में लिखा है। हत्या व हत्या के प्रयास में उम्रकैद काट रहे लखन को अदालत ने दो मई 2025 को बाइज्जत बरी कर दिया। लेकिन अपने को दोषमुक्त साबित करने में उन्हें 43 वर्ष लग गए।
अभियोजन के मुताबिक, कौशाम्बी गांव के रहने वाले लखन लाल को वर्ष 1977 में हत्या व हत्या के प्रयास के आरोप में कौशाम्बी पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इसके बाद उन्हें 1982 में जिला न्यायालय की ओर से आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। लेकिन लखन लाल ने हार नहीं मानी। हाईकोर्ट में अपील की। 43 साल तक मुकदमा चला। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें दो मई 2025 को दोष सिद्ध न होने पर बरी करने का आदेश जारी किया।
जेल अधीक्षक अजितेश कुमार ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद बुजुर्ग के परिजनों को बुलाकर लिखा-पढ़ी की गई। मंगलवार को उन्हें कारागार से मुक्त कर परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया।
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जिला विधिक प्राधिकरण ने किया सहयोग
लखन लाल ने बताया कि न्यायालय में सजा के दौरान उन्होंने और उनके परिजनों ने उच्च न्यायालय, उच्चतम न्यायालय, सीएम योगी, कानून मंत्री को ट्वीट करने के साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से इन्साफ की गुहार लगाई। प्राधिकरण के निर्देश पर लीगल एडवाइजर अंकित मौर्य ने पैरवी में उनका सहयोग किया।