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Kaushambi : झमाझम बारिश के बीच हुआ दारानगर का ऐतिहासिक कुप्पी युद्ध, देखने के लिए उमड़ी भारी भीड़

Fri, 03 Oct 2025 06:20 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांंबी

सार

कड़ा श्री रामलीला कमेटी दारानगर में विजयदशमी और उसके दूसरे दिन एकादशी के दिन एक अजीबोगरीब परंपरा है। यहां पर विजयदशमी के दिन राम-रावण का सजीव युद्ध होता है, जो एक प्लास्टिक की बनी कुप्पी से लड़ा जाता है।
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दारानगर में झमाझम बारिश के बीच संपन्न हुआ ऐतिहासिक कुप्पी युद्ध। - फोटो : संवाद।
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विस्तार
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कड़ा श्री रामलीला कमेटी दारानगर में विजयदशमी और उसके दूसरे दिन एकादशी के दिन एक अजीबोगरीब परंपरा है। यहां पर विजयदशमी के दिन राम-रावण का सजीव युद्ध होता है, जो एक प्लास्टिक की बनी कुप्पी से लड़ा जाता है। राम-रावण दल में 25-25 सेनानी होते हैं। विजयदशमी के दिन चार युद्ध और एकादशी के दिन तीन युद्ध होता है। युद्ध में सेनानी एक दूसरे पर प्रहार करते हैं। युद्ध इतना भयंकर होता है कि देखने वालों की रूहें काप जाती हैं। युद्ध सूर्यास्त के पहले संपन्न हो जाता है। युद्ध का प्रारंभ शीटी बजने पर होता है और खत्म भी शीटी बजने पर किया जाता है। 

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युद्ध छुड़वाने के लिए कमेटी के पदाधिकारी लगे रहते हैं। पहले दिन के युद्ध में रावण की सेना राम की सेना पर भारी पड़ती है, लेकिन दूसरे दिन के युद्ध में रावण की सेना को परास्त कर राम की सेना विजय प्राप्त करती है। इस युद्ध में किसी भी सेनानी को अगर चोट लग जाती है तो वह रणभूमि की मिट्टी से लगा लेता है। कमेटी के संरक्षक मूल प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि यह परंपरा 246 वर्षों से निरंतर चली आ रही है इस युद्ध को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग आते हैं। कौशाम्बी के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, एसडीएम सिराथू, सीओ सिराथू, दारानगर, कड़ा धाम नगर पंचायत के प्रतिनिधि अरुण केसरवानी मौके पर मौजूद रहे।


दारानगर की रामलीला में रावण का वध विजयदशमी के दूसरे दिन यानी एकादशी को होता है। कमेटी के अध्यक्ष जय मणि तिवारी ने बताया कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता यह है कि जब रावण का वध हुआ था तो उस समय विजयदशमी की तिथि थी, लेकिन जब उसके प्राण पखेरु उड़े तो उस समय एकादशी थी। इसीलिए यहां रावण का वध एकादशी को होता है। आज ही के दिन लक्ष्मण जी को मेघनाथ के द्वारा शक्ति बाण मारा जाता है। इसके बाद सुषेन वैद्य के कहने पर हनुमान जी संजीवनी बूटी लेकर आते हैं। उसके बाद लक्ष्मण की मूर्छा समाप्त होती है।

मेघनाथ का वध भी एकादशी के दिन ही होता है। मेघनाथ का सिर लेने के लिए सुलोचना भगवान राम के पास जाती हैं। भगवान राम उन्हें मेघनाथ का सिर दे देते हैं। इसकी लीला भी आज ही के दिन संपन्न होती है। दारानगर की रामलीला में दशहरा देखने के लिए काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। बच्चों ने झूला खिलौने का आनंद लिया तो महिलाओं ने मीना बाजार में जमकर खरीदारी की। 
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भगवान इंद्र भी नहीं रोक पाए राम रावण का कुप्पी युद्ध

शुक्रवार को दारानगर की रामलीला में एकादशी के दिन कुप्पी युद्ध लक्ष्मण को शक्ति बाण एवं मेघनाथ रावण का वध होता है। बरसात होने के कारण लीलाएं तो संपन्न कराई गईं, लेकिन कमेटी के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ग्राउंड में पानी भर गया था। पूरा ग्राउंड गीला हो गया था, जिसकी वजह से किसी तरह लीलाएं संपन्न करवाई गई। आज तीन कुप्पी युद्ध होता है, लेकिन बरसात होने की वजह से राम रावण दल के 10-10 सेनानियों को लड़वा कर किसी तरह युद्ध संपन्न कराया गया।

जहां भगवान तैयार होते हैं और उनका श्रृंगार होता है। वहां से लेकर ग्राउंड तक लगभग दो किलोमीटर बारिश में कमेटी के पदाधिकारी एवं भक्त भगवान की सवारी लेकर पहुंचे और किसी तरह लीलाओं को संपन्न कराया गया। छाता लगाकर लीलाओं को संपन्न कराया गया। ड्यूटी में तैनात क्षेत्राधिकारी सिराथू सत्येंद्र तिवारी और थानाध्यक्ष कड़ा धाम छाता लगाकर पूरे मेला क्षेत्र में भ्रमण करते रहे। दूर-दराज से आए मेला देखने वाले वालों को काफी निराशा हुई। काफी लोग बिना मेला देखे वापस चले गए।

कट गया यार खोल ले इतना मुंह में मरे साला यार नहीं जो लोग मेला क्षेत्र में मेला देखने के लिए पहुंच गए थे वह पूरी तरह भीग गए दुकानदारों की भी स्थिति बहुत देनी रही दुकानों में लोगों के पानी भर गया चाट की दुकान लगाने वाले रविशंकर ने बताया की हम लोग मेला में आए थे लेकिन पानी बरसने की वजह से पूरी दुकानदारी खराब हो गई वहीं सिंगार का सामान बेचने वाले गोपी नाथ ने बताया की पानी की वजह से मेले में लोग नहीं आए इसलिए हम लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ा मेला क्षेत्र में महिलाएं एवं बच्चे काफी संख्या में भीग गए।
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