महिला अपराध की रोकथाम को लेकर भले ही केंद्र तथा प्रदेश सरकार ने सख्त कदम उठाने का निर्देश दे रखा हो, लेकिन जिला पुलिस का सिस्टम अभी भी पुराने ढर्रे पर है। ऐसा ही जगन्नाथपुर गांव से 30 अप्रैल को लापता साजिया बानो के साथ हुआ।
साजिया के लापता होने के बाद पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर बरामदगी के लिए दो टीमों के गठन का दावा तो किया, लेकिन टीम कहां खोजबीन करने गईं? इस बाबत कोई कुछ नहीं बोल नहीं रहा है। अब तो खुद पइंसा थानाध्यक्ष मामला चित्रकूट जिले का होने का बताकर प्रकरण से पल्ला झाड़ रहे हैं।
पइंसा कोतवाली के जगन्नाथपुर से साजिया बानो के लापता होने के बाद एक मई को गुमशुदगी दर्ज की गई। इस बीच, सात मई को साजिया का शव चित्रकूट जिले के राजापुर कोतवाली अंतर्गत तीरमऊ गांव के समीप लावारिस हालत में मिला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की पुष्टि हुई।
सोशल मीडिया के जरिये 22 मई को साजिया के पिता रुकुउद्दीन ने राजापुर थाने जाकर शव की फोटो व कपड़े देखकर शिनाख्त की, लेकिन जिले की पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी, जबकि गुमशुदगी दर्ज करने के बाद पुलिस डीसीआरबी के जरिये पहले जिले के थानों व फिर गैर जनपदों में स्पेशल मैसेंजर भेजकर तलाश करती है।
वहीं दूसरी ओर चित्रकूट जिले की राजापुर पुलिस ने भी अज्ञात शव मिलने के बाद ऐसा कोई कदम नहीं उठाया। नतीजा रहा कि साजिया की हत्या कर शव नाले के किनारे फेंक दिया गया, जबकि सीओ सिटी सत्येंद्र कुमार तिवारी का कहना है, पइंसा थाने तथा सर्विलांस टीम को खोजबीन के लिए लगाया गया था।
इन टीमों ने कितने मोबाइल नंबर ट्रेस किए और इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरे देखे, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। सबसे हैरानी की बात तो यह है कि पइंसा थानाध्यक्ष जगदीश कुमार अब यह कह रहे हैं कि शव चित्रकूट के राजापुर में मिला है। वहां हत्या का मुकदमा दर्ज है। घटना की बाबत आगे की कार्रवाई राजापुर पुलिस करेगी।
आखिर क्या था घरवालों की चुप्पी का राज
मंझनपुर। शव मिलने के बाद साजिया के पिता ने राजापुर पुलिस को बताया कि उनकी बेटी की दोस्ती सोशल मीडिया के माध्यम से टिकरा सिरावल गांव के अमित कुमार से थी। वह लोग सोशल मीडिया में चैटिंग करते थे, जिसका घरवाले विरोध करते थे। अमित ही बेटी को अगवा करके ले गया, जबकि पइंसा में जब साजिया की गुमशुदगी दर्ज कराई गई तो तहरीर में इस बात का कोई जिक्र नहीं था। संवाद
अज्ञात शव की पहचान में नहीं दिखाई गई संजीदगी
मंझनपुर। पुलिस विभाग के एक अफसर ने बताया कि अगर लड़की या लड़का बालिग होता है तो प्रथम दृष्टया यह मान लिया जाता है कि वह या तो अपनी मर्जी से गया या फिर प्रेम-प्रसंग का मामला था। इसके बाद भी खोजबीन को नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। अज्ञात शव मिलने के बाद शिनाख्त के लिए उसे तीन दिन तक पोस्टमार्टम हाउस में रखा जाता है। इसके बाद डीसीआरबी के जरिये जिले व आसपास के जनपदों के थाने से भी पता किया जाता है। संवाद