अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए विस्फोट ने आसपास के लोगों को हिलाकर रख दिया। करीब दो घंटे तक रुक-रुककर हुए धमाकों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि बिजिया निवासी बैंककर्मी मंजीत कुमार के चार मंजिला मकान की तीन मंजिलों की दीवारों में दरारें पड़ गईं। कई जगह ईंटें उखड़ गईं। खिड़कियों में लगीं लोहे की ग्रिल टेढ़ी हो गईं। शीशे चकनाचूर हो गए। कमरों की दीवारों में जगह-जगह दरारें पड़ने से परिवार सहमा हुआ है।
मंजीत कुमार पत्नी सविता, बेटे प्रवीण, बेटियों तानिया और प्रांजलि और बहन तनु के साथ इसी मकान में रहते हैं। धमाकों की आवाज और कंपन से मकान हिलने लगा तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। सभी जान बचाने के लिए घर से बाहर की ओर दौड़े। दहशत के कारण परिवार के कुछ बच्चे बेहोश हो गए। विस्फोट के दौरान उड़ी ईंटें और मलबा लगने से परिवार के सदस्य घायल हो गए।
परिजनों के मुताबिक, दो बच्चों को पूरामुफ्ती स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अन्य घायलों को प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल भेजा गया। हादसे के बाद मकान की हालत देखकर परिवार के लोग चिंतित हैं। दीवारों और कमरों में पड़ी दरारों से उन्हें मकान की सुरक्षा को लेकर डर सता रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धमाकों की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के मकान भी हिल गए। कुछ समय के लिए ऐसा लग रहा था कि आसपास के सभी मकान कभी भी ढह सकते हैं। विस्फोट की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि फैक्टरी की टीनशेड का एक हिस्सा करीब डेढ़ सौ मीटर दूर जाकर बड़े आम के पेड़ में अटक गया।
विस्फोट से निकले ईंट और मलबे के टुकड़े दूर तक छिटके। इनकी चपेट में आने से आसपास के मवेशी भी घायल हुए। ग्रामीणों के मुताबिक, ईंट के टुकड़े लगने से कुछ मवेशियों की सींग तक उखड़ गईं।