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50 रुपये में बिक रहा दस रुपये का स्टांप पेपर

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50 रुपये में बिक रहा दस रुपये का स्टांप पेपर
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चायल। ई-स्टांप व्यवस्था लागू होने के बाद से छोटे स्टांप पेपरों का संकट खड़ा हो गया है। कोषागार से दस, बीस, 50 और सौ रुपये वाले स्टांप पेपर नहीं मिलने से तहसील में कालाबाजारी हो रही है। वेंडर दस रुपये का स्टांप 50 रुपये में बेच रहे हैं।
छह माह से तहसील और रजिस्ट्री दफ्तरों में ई स्टांप व्यवस्था लागू है। बड़े स्टांप पेपरों की जगह अब जमीन की रजिस्ट्री आदि कार्यों में लोग ई-स्टांप का ही इस्तेमाल करते हैं। लेकिन शपथ पत्र आदि कार्यों में दस, बीस, 50 व सौ रुपये के स्टांपों की जरूरत पड़ती है। स्टांप पेपरों की छपाई बंद होने से कोषागार से स्टांप नहीं मिल रहे हैं। तहसीलों के वेंडर छोटे स्टांप पेपरों की कालाबाजारी कर रहें है। दस रुपये का स्टांप 50 रुपये और बीस, पचास व सौ रुपये का स्टांप पेपर तीन गुने दामों पर बेच रहे हैं। काम निकालने के लिए लोग ब्लैक में स्टांप पेपर की खरीदारी करने को मजबूर हैं।
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वहीं बताया जाता है कि ई-स्टांप व्यवस्था से वेंडरों को नुकसान हुआ है। नाम न छापने की शर्त पर चायल तहसील के एक वेंडर ने बताया कि ई स्टांप व्यवस्था लागू होने से पहले तक कोषागार के जरिए उन्हें एक लाख रुपये के स्टांप पेपर खरीदने पर 1098 रुपये कमीशन मिलता था, लेकिन ई-स्टांप व्यवस्था प्रभावी होने के बाद से कमीशन घटकर एक लाख पर मात्र 190 रुपये हो गया है।
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वहीं एसडीएम चायल ज्योति मौर्या का कहना है कि तहसील में ई-स्टांप व्यवस्था प्रभावी होने के कारण दस, बीस और 50 रुपये के स्टांप पेपरों की कमी जरूर है, लेकिन स्टांप पेपर के कालाबाजारी की जानकारी नहीं है। यदि शिकायत मिली तो जांच कराकर आरोपी वेंडरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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