हवा के गर्म थपेड़ाें के साथ आसमान से बरसती आग थमने का नाम नहीं ले रही है। अप्रैल माह के आखिरी सप्ताह से शुरू हुई उमसभरी गर्मी का कहर फिर से एक बार शुरू है। मानसून का दबाव कम होने से पुरवा के चलते फिर पारा चढ़ने लगा है। सुबह के आठ बजते ही आसमान से तीखी धूप के साथ आग बरसने लगती है। इसके चलते लोगों को घरों से बाहर निकलने से पहले कई बार सोचना पड़ता है। भीषण गर्मी और लू के लगातार जारी कहर से बाहर निकलने वाले लोगों में हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ता जा रहा है। आमजन के साथ पशु-पक्षी भी गर्मी से व्याकुल हो रहे है।
दोआबा में अप्रैल माह के पहले सप्ताह से ही गर्मी का भीषण कहर शुरू है।गर्म हवा के थपेड़ाें के साथ बरस रही आग के चलते पारा लगातार बढ़ता जा रहा है। दो दिन पहले तूफान के साथ हुई बूंदा-बांदी से पल भर के लिए लोगों ने राहत महसूस की। इसके बाद मानसून का दबाव नहीं बनने से थमी पुरवा हवा ने सितम ढाना शुरू कर दिया है। दो दिन से फिर पारा 40 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच चुका है। शनिवार को तेज धूप के साथ उमसभरी गर्मी ने जीना मुहाल कर दिया है।
घरों में कैद लोग भी भीषण तपिश और लू से बच नहीं पा रहे हैं। पक्के मकान भी गर्मी से बुरी तरह दहक रहे हैं। बगैर कूलर और एसी के पक्के मकानों में एक पल भी बैठना मुश्किल हो रहा है। महगांव स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ.अजय कुमार के मुताबिक शनिवार को पारा 43 के आस-पास आंका गया। बताया कि पारा चढ़ना और लुढ़कना हवा पर निर्भर है। भीषण गर्मी और लू से फिलहाल निजात मिलती नहीं दिख रही है। मानसून का दबाव नहीं बनने से पारा लुढ़कने के बाद चढ़ा है।
उमसभरी गर्मी से तर-बतर लोगों को निजात पाने के लिए अभी सात दिन तक इंतजार करना पड़ सकता है। बूंदा-बांदी के बाद पारा बढ़ने से गर्मी ने फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। कृषि वैज्ञानिक की माने तो बिहार तक आने के बाद मानसून लौटा है। सप्ताह भर बाद ही मौसम के करवट लेने की संभावना है।
जिला प्रशासन की अनदेखी के चलते दोआबा के तालाब-पोखरे सूखे पड़े है। जंगलों में बसेरा करने वाले पशु-पक्षी उमस भरी गर्मी से प्यास से व्याकुल हो रहे है। दो दिन पहले प्यास से व्याकुल राष्ट्रीय पक्षी मोर की सैनी के मटियरा गांव में तड़प-तड़प कर मौत हो गई। इसके बाद भी किसी ने इनकी सुध नहीं ली।