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तालाब में डूबने से तांगा चालक की मौत

Tue, 05 Sep 2017 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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भरसवां में तालाब में वृद्ध का शव खोजते लोग। - फोटो : amar ujala
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मंझनपुर के भरसवां में सोमवार सुबह तांगा चालक घर के समीप तालाब में डूब गया। घंटों पुलिस और गोताखोर के नहीं पहुंचने पर उग्र ग्रामीणों ने चक्काजाम कर दिया। पुलिस फोर्स के साथ घटनास्थल पहुंचे। एसडीएम ने ग्रामीणों को शांत कराते हुए जाम हटवाया। शाम करीब पांच बजे पुलिस ने शव तालाब से बाहर निकलवाते हुए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। तांगा चालक की मौत से परिजनों का रो-रोकर हाल बेहाल है।
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 मंझनपुर कोतवाली के भरसवां गांव का बफाती (40) पुत्र खैराती पत्नी रसीदा और तीन बेटे, बेटी के साथ रहता था। तांगा चलाकर बफाती परिवार की जीविका चलाता था। सोमवार की सुबह करीब 10 बजे वह घर से कुछ दूरी पर स्थित तालाब किनारे गया था। इसी दौरान पैर फिसलने से वह तालाब के गहरे पानी में औंधे मुंह समा गया। अधेड़ को तालाब में डूबते देख परिवार के लोग चीखते हुए घटनास्थल की ओर दौड़े। चीख-पुकार सुन मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।

ग्रामीणों ने घटना की जानकारी सीओ के साथ इलाकाई पुलिस को दी। घंटे भर बीतने के बाद पुलिस और गोताखोर के नहीं पहुंचने पर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। मंझनपुर महेवाघाट मार्ग पर पहुंच ग्रामीणों ने चक्काजाम कर दिया। उधर बवाल की सूचना मिलते ही एसडीएम सदर विवेक चतुर्वेदी मंझनपुर कोतवाल पुलिस फोर्स के साथ घटनास्थल पहुंचे। अफसरों ने ग्रामीणों को समझाते हुए शांत कराया। शाम करीब पांच बजे पुलिस ने तांगा चालक के शव को तालाब से बाहर निकाला। पुलिस ने जांच पड़ताल के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधेड़ की मौत से परिजनों का रो-रो कर हाल बेहाल है।
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फायर कर्मी ने तालाब से निकाला शव
भरसवां गांव में हंगामे के बीच पहुंचे फायरमैन रमेश मिश्र ने जान की परवाह न करते हुए बफाती का शव तालाब से खोज निकाला। 15 मिनट लगातार गोता लगाते हुए जब वह शव लेकर बाहर निकला तो पुलिस कर्मियों ने राहत की संास ली। तालाब में इतना कीचड़ था कि स्थानीय गोताखोर उतरने को तैयार नहीं थे।
 
कैसे होगा अफसाना का हाथ पीला
भरसवां गांव के बफाती के बाद कमाई का एक मात्र सहारा तांगा था। जिसके भरोसे वह सात बच्चो के साथ पत्नी और खुद का भरण पोषण करता था। बड़ी बेटी अफसाना शादी के योग्य है। बफाती की मौत के बाद पत्नी रशीदा बस यही कह कर बेसुध हो जाती थी कि अब उसके परिवार की देखरेख कौन करेगा और बेटी के हाथ कैसे पीले होंगे।
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