विधायक किंग मेकर के नाम से विख्यात रहे शिव सागर सिंह की हत्या के बाद उनकी कमान बेटे सुघर सिंह ने बखूबी संभाल रखी थी। क्षत्रियों के अगुवा के रूप में वह अपने पिता के रास्ते पर चल रहे थे और ठाकुरों को काफी हद तक एकजुट भी कर रखा था। सुघर सिंह के जेल जाने के बाद से एकजुटता खतरे में आ गई है। ऐसे में क्षत्रियों का अगुवा बनने के लिए उनके परिवार के अलावा अन्य लोगों ने दावा ठोंकना शुरू कर दिया है। कौन इसमें कितना कामयाब होगा, अभी यह देखना बाकी है, लेकिन परिवार में ही इसको लेकर मतभेद भी शुरू हो गया है। यही कारण है कि इस घराने से बाहर के लोग भी नेतृत्व करने के लिए आगे आने लगे हैं।
सपा नेता शिव सागर सिंह जिले में विधायक किंग मेकर के नाम से जाने जाते थे। वर्ष 2005 में उनकी हत्या कर दी गई थी। इसके बाद उनके बेटे सुघर सिंह ने उनकी जगह संभाल ली थी, वह भी पूरी जिम्मेदारी के साथ। सुघर सिंह ने पिता के खाली चल रहे पद डिस्ट्रिक्ट कोआपरेटिस बैंक अध्यक्ष पद को तो संभाला ही, हाल ही में वह पीसीएफ के डायरेक्टर भी हो गए थे। प्रतापगढ़ के कुंडा विधायक व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह से उनके पारिवारिक संबंध थे।
इसका भी फायदा सुघर सिंह व जिले के क्षत्रियों को मिलता रहा। अपर जिला सत्र एवं न्यायाधीश (पंचम) ने हत्या के एक मामले में सुघर सिंह समेत तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सुघर सिंह व उनके साथी हत्यारोपी जेल में हैं। सुघर सिंह को जेल की सजा होने से जिले में सपाइयों के साथ क्षत्रियों को तगड़ा आघात लगा है। वह क्षत्रियों के नेता के रूप में गिने जाते थे। ऐसे में उनके जेल जाने से अब क्षत्रियों की अगुवाई करने वालों के लिए गिने-चुने ही नाम बचे हैं। सुघर सिंह के चाचा राम सागर सिंह का दावा इसके लिए मजबूत है, लेकिन इस घराने से बाहर के लोग भी अब क्षत्रियों पर अपनी पकड़ मजबूत होने का दंभ भरकर नेतृत्व संभालने की कोशिश में जुट गए हैं।