अपनों का बंधन तोड़ एक छात्रा अपना कॅरियर सुधारना चाहती है। स्नातक की डिग्री ले चुकी इस छात्रा की आगे की शिक्षा पर परिजनों ने रोक लगा दिया। परिजनों की इच्छा की भेंट चढ़ रहे कॅरियर को देख छात्रा हैरान-परेशान है। उसने जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत कर डीआईओएस से मदद की गुहार लगाई है।
दोआबा के भैरोपुर की बीना पाल विज्ञान वर्ग से स्नातक है। 2012 में बीएससी की शिक्षा पूरी होने बाद छात्रा के पिता ने आगे की पढ़ाई पर बंदिश लगा दिया। चार साल से छात्रा घर पर रहकर घरेलू कार्यों में व्यस्त रहती है। आगे की शिक्षा बंद होने से छात्रा का कॅरियर दांव पर लग गया है। इसे लेकर वह परेशान है। छात्रा ने जन सुनवाई पोर्टल के 20242 नंबर पर बीएसए/डीआईओएस से शिकायत दर्ज कराया है कि जब वह आगे पढ़ाई करना चाह रही है तो परिजन रोक क्यों लगा रहे है।
इस बावत छात्रा ने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए पत्र में बताया कि जब 18 साल की आयु पूरी कर लेने वाले प्रत्येक हिंदुस्तानी को स्वविवेक से कार्य करने की स्वतंत्रता है तो उसके शिक्षण कार्य में परिजनों की बंदिशें क्यों है। छात्रा का पत्र मिलने के बाद शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों को राह नहीं सूझ रही कि वह बीना पाल को आगे की शिक्षा कैसे दिलाएं। जन सुनवाई पोर्टल पर हुई शिकायत के निस्तारण की राह अफसरों को नजर नहीं आ रही है।
मां है टीचर तो पिता ट्रक चालक
कॅरियर को लेकर चिंतित छात्रा बीना पाल के घर में पैसे की कोई कमी नहीं है। जन सुनवाई पोर्टल पर की गई शिकायत की माने तो छात्रा की मां पेशे से अध्यापिका है और पिता ट्रक चालक। उसके मां-बाप ने समाज की बदनामियों के भय से आगे की शिक्षा पर बंदिश लगाई है। परिजनों की इस बंदिश को तोड़कर वह कॅरियर को लेकर संघर्ष करती देखी जा रही है।
टीवी पत्रकारिता का है सपना
स्नातक की पढ़ाई पूरी करने वाली बीना पाल का सपना टीवी पत्रकारिता का है। उसने अपने मन में टीवी पत्रकार के रूप में देश दुनिया की खबरों को सुबह-सवेरे दर्शकों के सामने आकर बताने का सपना पाल रखा है। उसकी यह ख्वाहिश परिजनों की जिद के आगे दफन होती दिख रही है।
परिजन करना चाह रहे हैं शादी
छात्रा बीना पाल ने वर्ष 2012 में बीएसए की है। स्नातक की डिग्री लेने के बाद वह चार साल से घर में बैठी है। 20 साल की आयु पूरी कर चुकी छात्रा का भविष्य अब दांव पर है। डीआईओएस से की गई शिकायत की माने तो छात्रा के परिजन अब उसकी शादी कर घर परिवार बसाने की सोच रहे हैं।
स्वतंत्रता के लिए 18 साल आयु का दिया हवाला
भैरोपुर की छात्रा बीना पाल ने जन सुनवाई पोर्टल पर खुद की स्वतंत्रता के लिए 18 साल की आयु का हवाला दिया है। छात्रा ने पत्र में साफ लिखा है कि भारतीय संविधान में किसी भी लड़की-लड़के के बालिग होने पर उसे अपने भविष्य के फैसले खुद करने का अधिकार है। ऐसे में उसे आगे की शिक्षा और कॅरियर सुधारने का अधिकार क्यों नहीं है। जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत करने के बाद अफसरों के हाथ आखिर उसकी मदद के लिए आगे क्यों नहीं उठ रहे हैं।
छात्रा का पत्र शुक्रवार को मिला है। किसी काम से बाहर चला आया हूं। लौटकर पत्र को संज्ञान में लिया जाएगा। छात्रा का कॅरियर सुधर सके इसके लिए हर संभव कोशिश की जाएगी।
अशोक कुमार सिंह, डीआईओएस कौशाम्बी