मंझनपुर। शौचालय निर्माण को आई 80 फीसदी से ज्यादा रकम यानि करीब 2.50 करोड़ रुपये प्रचार-प्रसार में ही खर्च कर दिए गए हैं। वह भी 30 दिन में जागरूकता के 11 कार्यक्रमों का आयोजन करके, जबकि योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आई कुल रकम का सिर्फ 10 फीसदी यानि करीब 31 लाख रुपये ही प्रचार-प्रसार पर खर्च होना था। इलाहाबाद के एनजीओ संचालक पंकज कुमार ने इसकी शिकायत ग्रामीण विकास मंत्री भारत सरकार से शिकायत की है। केंद्र सरकार ने प्रमुख सचिव पंचायतीराज ने प्रदेश प्रदेश से 15 दिन में इसकी रिपोर्ट मांगी है। इससे अफसरों में हड़कंप मचा है।
वित्तीय वर्ष 2013-14 में पंचायतीराज विभाग की योजनाओं के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी जिले में विंग संस्था को दी गई थी। संस्था द्वारा नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाना था। इसमें लोगों को घरों में शौचालय बनवाने, घरों को साफ-सुथरा रखने, कचरा-कूड़ा कूड़ेदान में डालने, घर के सामने बनी नालियों को साफ रखने आदि की जानकारी ग्रामीणों को दी जानी थी।
इलाहाबाद के रहने वाले स्वयंसेवी संस्था के संचालक पंकज कुमार ने बताया कि फरवरी और मार्च 2014 में संस्था की ओर से जिले में प्रचार-प्रसार के 11 कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। इन कार्यक्रमों पर 2.50 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। पंकज कुमार ने बताया कि निर्माण कार्यों पर खर्च की गई रकम से सिर्फ 10 फीसदी रकम ही प्रसार-प्रसार पर खर्च किए जाने का शासनादेश है। उनके मुताबिक इस वित्तीय वर्ष में करीब 3.17 करोड़ रुपये की लागत से 6 हजार 911 शौचालय ही कौशाम्बी में बनवाए गए हैं। ऐसे में प्रचार पर सिर्फ 31 लाख रुपये ही खर्च होना चाहिए। जबकि कौशाम्बी में शासनादेश की अनदेखी करके प्रसार-प्रसार पर 2.50 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए हैं।
आरोप है कि फर्जी बिल, बाउचर लगाकर अफसरों ने एनजीओ से मिलकर रकम डकारने का काम किया है। पंकज कुमार ने महीने भर पहले केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री से इसकी शिकायत की है। केंद्र सरकार के प्रमुख सचिव पंचायतीराज ने पत्र भेजकर प्रमुख सचिव पंचायतीराज उत्तर प्रदेश से 15 दिन में रिपोर्ट तलब की है। वहीं प्रदेश के पंचायतराज विभाग के प्रमुख सचिव ने पत्र भेजकर जिलाधिकारी कौशाम्बी को सात दिन में रिपोर्ट उपलब्ध का फरमान जारी किया है। इसे लेकर जिले के अफसरों में खलबली मची है। चर्चा है कि जांच हुई, तो तत्कालीन दो जिलाधिकारी, सीडीओ, डीपीआरओ और एक एडीओ पंचायत का इसमें फंसना तय है। मामले में डीएम राजमणि यादव ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। पत्र मिलते ही इसकी जांच कराई जाएगी।