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सोलर लाइट पर करोड़ाें खर्च, फिर भी लोहिया गांवों में अंधेरा

Wed, 31 Aug 2016 12:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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बिजली बचाने के लिए शासन सोलर लाइट के प्रयोग पर बल दे रही है। मंशा है कि बिजली की खपत को कम किया जाए। मगर सोलर लाइट को लगवाने वाले जिम्मेदारों ने ही इस योजना में लूट मचा दी। सूबे की सरकार ने लोहिया समग्र गांवों को रात में रोशन रखने के लिए करोड़ों रुपया पानी की तरह बहा दिया। गांवों को रोशन करने की जिम्मेदारी नेडा को सौंपी गई लेकिन कार्यदाई संस्था की मनमानी के चलते रोशन हुए गांव छह माह में ही अंधेरे में डूबने लगे हैं। साल भर पहले गांवों में लगी सोलर लाइटें अब काम नहीं कर रही हैं। इसके चलते लोहिया गांवों के बाशिंदे अंधेरे में रहने को मजबूर हैं।
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यूपी के सीएम ने सत्ता संभालने के बाद लोहिया ग्राम्य योजना की शुरुआत की। योजना शुरू होने के बाद लोहिया गांवों को मूलभूत सुविधाओं से लैस किया जाने लगा। बिजली के अभाव में ग्रामीण अंधेरे में न रहें, इसके लिए सोलर लाइट का इंतजाम आबादी के हिसाब से कराया गया। इसकी जिम्मेदारी शासन ने नेडा विभाग को दे दी। कार्यदाई संस्था ने चयनित लोहिया समग्र गांवों को रोशन करने के लिए सोलर लाइट लगवाई।

ग्रामीणों को बताया गया कि लाइट तीन साल से पहले खराब होने पर इसे विभाग ठीक कराएगा। मगर घटिया बैट्री, बल्ब और अन्य उपकरण के चलते लोहिया गांवों में लगी सोलर लाइट छह माह भी नहीं चल सकी है। बानगी के तौर पर सिराथू ब्लॉक के लोहिया समग्र गांव शिवपुर बसोहनी को लिया जा सकता है। यह गांव वर्ष 2014-15 में लोहिया समग्र गांव के रूप में घोषित किया गया था। इस गांव में नेडा ने कुल 12 सोलर लाइट लगवाया था। इनमें से आठ सोलर लाइट छह माह के बाद खराब हो गई। अब ग्रामीण इन्हें या तो अपने पैसे से ठीक करा रहे हैं या फिर खराब पड़ी हुई हैं। ऐसे में साफ है कि शासन ने भले ही लोहिया गांवों को रोशन रखने के लिए करोड़ाें रुपये पानी की तरह खर्च किया हो पर गांवों में अंधेरा छाया हुआ है।
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नहीं उठता टोल फ्री नंबर
गांवों में लगवाई गई सोलर लाइटों के बाक्स में कंपनी का एक टोल फ्री नंबर लिखा हुआ है। लाइट लगाते समय कार्यदाई संस्था के जिम्मेदारों ने बताया था कि यदि तीन साल तक कोई खराबी लाइट में आती है तो इस नंबर पर ग्रामीण फोन कर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत के बाद कंपनी के जिम्मेदार गांव पहुंचकर खराब लाइट को ठीक कराएंगे लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। ग्रामीण उपभोक्ता लाइट खराब होने पर टोल-फ्री नंबर लगाते रहते हैं पर कोई फोन ही रिसीव नहीं करता। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोहिया गांवों में लगवाई गई सोलर लाइट को लेकर विभागीय जिम्मेदार कितने संजीदा हैं।

गांव में पिछले साल सोलर लाइट लगवाई गई थी। छह महीने के भीतर लाइट जलना बंद हो गई। टोल फ्री नंबर पर कई बार संपर्क साधने का प्रयास किया गया पर किसी ने फोन रिसीव नहीं किया। तब से आज तक लाइट जस की तस पड़ी हुई है।
फूलचंद्र यादव, शिवपुर बसोहनी

लोहिया गांव होने के बाद एक दर्जन सोलर लाइट लगवाई गई थी। बिजली न आने पर भी गांव रोशन रहता था लेकिन घटिया सामग्री लगे होने की वजह से 60 फीसदी से अधिक लाइट खराब हो चुकी हैं। इससे गांव में अंधेरा छाया रहता है।
अनिल कुमार, शिवपुर बसोहनी

लोहिया गांव के लिए सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है लेकिन अफसरशासन के धन को चूना लगा रहे हैं। घटिया सामग्री होने की वजह से गांव में लगी सोलर लाइट काम करना बंद कर चुकी हैं। टोल-फ्री नंबर भी किसी काम का नहीं है।
पारसनाथ यादव, शिवपुर बसोहनी

लोहिया गांव शिवपुर बसोहनी में लगी दर्जनभर सोलर लाइट घटिया किस्म की थी। तीन साल की गारंटी वाली लाइट छह महीने में ही खराब हो गई। अब ग्रामीण अपनी जेब से खराब लाइट को ठीक करा रहे हैं।
संत लाल यादव, पूर्व प्रधान शिवपुर बसोहनी

बारिश के दिनों में लाइट के खराब होने की संभावना बढ़ जाती है। छह माह से लाइट के खराब होने पर उसमें सुधार नहीं होना गलत है। जल्द ही कमियों को दूर कराया जाएगा।
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राजमणि पांडेय, प्रोजेक्ट अधिकारी
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