जिले में होम्योपैथिक अस्पतालों में चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह से डॉक्टरों की मनमानी की भेंट चढ़ चुकी है। अस्पतालों से चिकित्सक और अन्य कर्मचारी अक्सर गायब रहते हैं। इससे होम्योपैथिक इलाज के लिए आने वाले मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार सीएमओ, सीडीओ और जिलाधिकारी से भी शिकायत की गई, लेकिन डॉक्टरों की मनमानी पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।
दोआबा में लोगों को उपचार केलिए होम्योपैथिक चिकित्सा के आठ अस्पताल खोले गए हैं। इसमें मंझनपुर, सिराथू, अजुहा, चायल आदि अस्पताल शामिल हैं। यहां पर तैनात चिकित्सक और फार्मासिस्ट गायब ही रहते हैं। मंझनपुर इलाके के ब्रह्मदत्त, शिवपूजन, इशरार अहमद, वीरेन्द्र कुमार, उमाकांत आदि लोगों का कहना है कि चिकित्सकों के गायब रहने से होम्योपैथिक चिकित्सा से रोगों का इलाज कराने आने वाले मरीजों को मायूस लौटना पड़ता है। कमोवेश यही हाल जिले की सभी होम्योपैथिक अस्पताल का है।