मोबाइल फोन और सोशल मीडिया का बढ़ता इस्तेमाल अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगा है। देर रात तक मोबाइल चलाने की आदत लोगों की नींद उड़ा रही है, जिसका सीधा असर आंखों और गर्दन पर पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में सर्वाइकल दर्द, आंखों में सूखापन, जलन और आंखों के नीचे ड्राइनेस की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है।
सोशल मीडिया, ऑनलाइन वीडियो और मोबाइल गेम्स के कारण लोग घंटों तक एक ही मुद्रा में मोबाइल देखते रहते हैं। इससे गर्दन की मांसपेशियों पर अधिक दबाव पड़ता है, और सर्वाइकल की समस्या उत्पन्न हो रही है।
लगातार स्क्रीन देखने से आंखों की नमी कम हो जाती है, जिससे आंखों में जलन, लालिमा और धुंधलापन जैसी परेशानी होने लगती है। मेडिकल कॉलेज के नेत्र सर्जन डॉ. हेमंत यादव ने बताया कि रोजाना ओपीडी में 120 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें से करीब 30 से 35 मरीज आंखों में सूखापन, जलन और स्क्रीन से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित होते हैं।
उन्होंने बताया कि इनमें बड़ी संख्या युवाओं और कामकाजी लोगों की है, जो देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने बताया कि नींद पूरी न होने से तनाव, चिड़चिड़ापन और सिरदर्द की समस्या भी बढ़ रही है।
इलाज के लिए आए मरीजों को डॉक्टर ने सलाह दी है कि मोबाइल का उपयोग कम से कम करें। सोने से एक घंटे पहले स्क्रीन से दूरी बनाएं और हर 20 मिनट में आंखों को आराम दें। साथ ही सही मुद्रा में बैठकर मोबाइल देखने और नियमित व्यायाम करने की भी सलाह दी गई है।
आरोग्य मेला : खांसी, जुकाम और गले में संक्रमण के मरीजों की उमड़ी भीड़
जिले के 33 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और तीन अर्बन स्वास्थ्य केंद्रों में रविवार को मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का आयोजन हुआ। शिविर में पहुंचे 1146 मरीजों का इलाज किया गया। इस दौरान नौ गंभीर मरीजों को मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में रेफर किया गया।
रविवार को जिले के 36 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का आयोजन हुआ। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टेंवा, सरसवां, पश्चिमशरीरा, शाहपुर और बैरमपुर का निरीक्षण किया। सीएमओ ने बताया की जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर हर रविवार को मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का आयोजन किया जाता है। इनमें ज्यादातर मरीज खांसी, जुकाम और गले में संक्रमण के रहे। उन्होंने बताया कि शिविर में 61 चिकित्साधिकारी व 143 पैरामेडिकल कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। इस दौरान सभी केंद्रों में 98 गोल्डन कार्ड और छह आभा आईडी भी बनाए गए है।