चायल (कौशाम्बी)। हुनरमंद और स्वस्थ रहकर ही मौजूदा दौर में कामयाबी हासिल की जा सकती है। सफलता के लिए सच्ची लगन और मेहनत जरूरी है। यह सीख नई पीढ़ी को मशहूर फिल्म निर्माता निर्देशक तिग्मांशु धुलिया ने दी है। वे शुक्रवार को पुरामुफ्ती स्थिति एसपीएमआईटी के वार्षिक खेल समारोह का शुभारंभ करने आए थे। वहीं खेल समारोह के दौरान संस्थान के छात्र-छात्राओं ने गली क्रिकेट, कैरम, चेस आदि खेलों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
पुरामुफ्ती स्थित एसपी मेमोरियल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी का तीन दिवसीय वार्षिक क्रीड़ा समारोह समन्वय-2015 शुक्रवार से शुरू हुआ। इस शुभारंभ दीप जलाकर फिल्म निर्माता तिग्मांशु धुलिया और संस्था की निदेशिका विजयश्री तिवारी ने किया। इस दौरान तिग्मांशु ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं की खोज ऐसे ही आयोजनों के माध्यम से संभव है। पांच मिनट के अपने संक्षिप्त उद्बोधन में उन्होंने खेल को अहम बताया। कहा कि हुनर के साथ-साथ स्वस्थ रहना भी जरूरी है। तभी कामयाबी प्राप्त की जा सकती है।
वहीं संस्था की निदेशिका विजयश्री तिवारी ने कहा कि संस्था का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के युवाओं को तकनीकी शिक्षा के साथ साथ मानसिक, शारीरिक, सांस्कृतिक विकास का मंच देना भी है। वहीं क्रीड़ा समारोह में पहले दिन की शुरूआत गली क्रिकेट से हुई। इसमें एसपीएमआईटी के साथ ही देव प्रयाग इंस्टीट्यूट, रिजवी कालेज आफ इंजीनियरिंग और महगांव इंटर कालेज की टीमों ने हिस्सा लिया। वहीं चेस, कैरम, बैडमिंटन, टग-ओ-वार आदि के भी खेल आयोजित किए गए। इस मौके पर संस्था के डीन नितिन श्रीवास्तव, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी अमित मिश्र, क्रीडा संयोजक प्रशांत चौधरी, रमेश अग्रहरि आदि मौजूद रहे।
एसपीएमआईटी के खेल समारोह का उद्घाटन करने पुरामुफ्ती आए मौजूदा दौर के मशहूर फिल्म निर्माता निर्देशक तिग्मांशु धुलिया ने बातचीत के दौरान कहा कि मौजूदा समय रियल सिनेमा का दौर है। पान सिंह तोमर, बुलेट राजा और साहब बीवी और गैंगेस्टर जैसी चर्चित फिल्मों में निर्देशन करने वाले धुलिया ने कहा कि देश में इसमें सबसे ज्यादा आबादी युवाओं की है। 45 वर्ष से कम उम्र के लोगों की ही इस देश में चल रही है। वे जैसी पंसद रखते हैं। वैसी सिनेमा बनानी उनकी मजबूरी है।
साथ ही जोड़ा कि अब जमाना कला नहीं कमार्शियल प्रेमी है। पाइरेसी का युग है। यदि सिनेमा बनाने और फिल्मों को हिट कराने में अंतराष्ट्रीय सहयोग न मिले, तो सिनेमा वाले भिखारी बन जाएंगे। फिल्मों में हास्य के नाम पर फूहड़ता और नंगापन परोसे जाने के नाम पर उन्होंने बचाव करते हुए कहाकि दौर बदल चुका है। अब परिवार के साथ पिक्चर देखने की फुर्सत किसी को नहीं है। लोग अब दोस्त-यारों के साथ ही फिल्म देखते हैं। नई-पुरानी फिल्मों के दौर और कलाकारों पर बात करने पर उन्होंने कहाकि पहले सिनेमा में नाटकीयता थी। अब रियल सिनेमा का युग है।