मंझनपुर/कड़ा। शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन बृहस्पतिवार को जगत जननी के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा की गई। पुत्र, ज्ञान और मोक्ष प्राप्ति के लिए श्रद्धालुओं ने मां की पूजा की। देवी दर्शन के लिए मंदिरों, पंडालों में भीड़ जुटी रही। इस दौरान घंटा-घड़ियाल और मां के जयकारों से क्षेत्र गूंजता रहा।
नवरात्र का पांचवां दिन स्कंदमाता का माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार असुर के वध के लिए देवी ने छह मुख वाले एक स्कंद कुमार की उत्पत्ति की और आगे चलकर स्कंद कुमार ने असुर का वध कर धर्म की स्थापना की। मान्यता है कि स्कंदमाता की सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्त को पुत्र, ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
बृहस्पतिवार को मंदिरों, पंडालों में मां की प्रतिमा को स्कंदमाता के रूप में सजाया गया। भक्तों ने मां के इसी स्वरूप की पूजा की। मंझनपुर स्थित श्री दुर्गा मंदिर में भोर से ही श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। यहां नगर समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भक्त मां की अराधना करने पहुंचे। पश्चिमशरीरा के झारखंडी माता की दरबार में कस्बा समेत आसपास के ग्रामीण माथा टेकने पहुंचे।
संचवारा स्थित आलोप शंकरी और अंबारी गांव स्थित देवी में दर्शन-पूजन के लिए दिनभर तांता लगा रहा। इसी तरह चांदकन स्थित मां चंद्रिका मंदिर में भक्तों ने विधि-विधान से देवी दर्शन किया। देवी मंदिरों, पंडालों में शाम को महाआरती हुई। 51 शक्तिपीठों में एक शीतला धाम कड़ा में बृहस्पतिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सुबह से ही कड़ा धाम के विभिन्न गंगा घाटों में भक्तों ने आस्था की डुबकी लगाई। स्नान-दान के बाद भक्त हाथों में नारियल चुनरी लेकर शक्तिपीठ मां शीतला दरबार पहुंचे।