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Kaushambi News: सिहोरी टोल प्लाजा को जालसाजों ने लगाई सवा चार करोड़ की चपत

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सिहोरी टोल प्लाजा के पास जालसाजों ने कंपनी को महज एक पखवाड़े के दौरान सवा चार करोड़ की चपत लगा दी। एक फास्टैग के सहारे दिन में 80 से 82 भारी वाहनों को गुजारा गया। सब कुछ ऐसे तरीके से अंजाम दिया गया कि कंपनी को एक पैसा मिला भी नहीं, उल्टा खाते से रकम कट गई। टोल के मुख्य ठेकेदार की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ धोखाध़ड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है।
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टोल प्लाजा के मुख्य ठेकेदार भोलानाथ राजपति शुक्ल ने बताया कि टोल की टेक्निकल टीम व ऑडिटर ने सूचना दी कि कुछ लोग टोल में फास्टैग की आड़ में फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। टोल से चंद कदम की दूरी पर बाइक में कई-कई फास्टैग लेकर वह भारी वाहनों को पास कराते हैं। टोल पार करने के बाद वाहन चालक से फास्टैग वापस ले लिया जाता है।
दूसरी तरफ से अगर कोई वाहन आता दिखा तो उसके साथ भी ऐसा ही किया जाता है। इसमें टोल की तकनीकी खामियों का लाभ जालसाजों ने खूब उठाया। रोजाना एक फास्टैग से 80 से 82 वाहन गुजारे जाते हैं। ऐसे 20 से 25 फास्ट टैग है, जिनका प्रयोग बार-बार किया गया। गड़बड़ी सामने आने पर भोलानाथ की तहरीर पर कोखराज कोतवाली पुलिस ने धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
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ऐसे होता है फ्रॉड

टोल के मैनेजर ने बताया कि इसमें फास्टैग बनाने वाले कुछ बैंकों की भूमिका भी संदेह के घेरे में हैं। बताया कि फास्टैग 72 घंटे तक मान्य होता है, बशर्तें वाहन एक्जिट (निकास) न करें। जालसाज पांच सौ रुपये लेकर वाहन को पास करा देते हैं। इसके बाद गिरोह के सदस्य आगे मौजूद रहकर कार्ड को वापस ले लेते हैं। इसके बाद उसी कार्ड को बाइक से फिर इस पार लाया जाता है। नतीजतन पैसा तो एक बार कटता है, लेकिन वाहन चाहे जितनी बार उससे गुजरे। ऐसे में टोल के खाते में पैसा तो एक बार आता है, लेकिन विभिन्न वाहनों के गुजारे जाने से फास्ट टैग के खाते में कंपनी का पैसा चला जाता है। यह पैसा भी जालसाज कैश बैक के जरिए वापस ले लेते हैं।
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