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Kaushambi : सरस्वती नदी के पुनर्जीवित होने के मिले संकेत, वैज्ञानिकों नमामि गंगे को भेजी डिजाइन

Fri, 07 Nov 2025 02:08 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांंबी

सार

राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई) हैदराबाद और उत्तर प्रदेश भू-जल बोर्ड मिलकर जमीन के भीतर दबी हुई सरस्वती नदी के जल स्तर को पुनर्भरित करने के लिए पेलियो चैनल के माध्यम से मैनेज्ड एक्वीफर रिचार्ज का डिजाइन तैयार किया है।
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एनजीआरआई हैदराबाद के वैज्ञानिकों की ओर से सरस्वती नदी के लिए तैयार की डिजाइन। - फोटो : संवाद।
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विस्तार
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राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई) हैदराबाद और उत्तर प्रदेश भू-जल बोर्ड मिलकर जमीन के भीतर दबी हुई सरस्वती नदी के जल स्तर को पुनर्भरित करने के लिए पेलियो चैनल के माध्यम से मैनेज्ड एक्वीफर रिचार्ज का डिजाइन तैयार किया है। यह परियोजना तीन जिलों को लक्षित करती है। गंगा और यमुना नदी का प्राकृतिक कनेक्टिविटी का उपयोग कर भूजल भरण किया जाएगा। इन पर ऑटोमैटिक वाटर लेवल इंडिकेटर्स लगाकर भूजल रिचार्ज की रियल टाइम मानिटरिंग की जाएगी। प्रस्ताव को मंजूरी के लिए नमामि गंगे परियोजना को भेजा गया है।

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एनजीआरआई के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. सुभाष चंद्रा ने बताया कि साल 2018 में डेनमार्क का स्काईटेम इलेक्ट्रॉमाग्नेटिक इक्विपमेंट के सहयोग से प्रयागराज के संगम क्षेत्र से कौशांबी के सरायअकिल तक हेलीबोन ट्रांजिएंट इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सर्वेक्षण किया गया था। इस सर्वे में हेलीकॉप्टर के माध्यम से 1200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 500 मीटर गहराई तक जलधाराओं का अध्ययन हुआ था। 2021 में नमामी गंगे एनजीआरआई के सहयोग से कौशाम्बी से 200 किलोमीटर आगे कानपुर के बिल्हौर और गजनेर तक 8000 वर्ग किलोमीटर में खोज किया गया।

खागा के निकट 15 मीटर नीचे मिट्टी में मिले निशान

एनजीआरआई की रिपोर्ट के अनुसार 15-25 मीटर और 25-50 मीटर गहराई में पश्चिम दिशा की ओर फतेहपुर के खागा के निकट दो मजबूत शाखाओं में 10-15 मीटर मोटी जलोढ़ मिट्टी की परत से दबी सरस्वती नदी पाई गई है। एक शाखा 15 मीटर मोटी 4-6 किलोमीटर चौड़ी होकर कानपुर के बिल्हौर तक गई है। वहीं, दूसरी मुख्य शाखा लोहगुरा गांव से दक्षिण की ओर मुड़ते हुए 160 किलोमीटर दूर गजनेर तक पहुंचती है। वैज्ञानिको की खोज से यह पता चला है कि एक बड़ी नदी के रूप में यह विशाल जल भंडार का स्रोत हुआ करती थी। जिसे रिचार्ज कर भू-जल भंडारण किया जा सकता है।

इससे भूजल की कमी को दूर किया जा सकता है। इसके लिए एनजीआरआई के विज्ञानी उत्तर प्रदेश भू-जल बोर्ड के साथ मिलकर गंगा और यमुना से प्राकृतिक रूप से जुड़ी सरस्वती नदी के पेलियो चैनल की साइटों के माध्यम से कौशाम्बी, फतेहपुर और कानपुर की छह स्थानों पर सरस्वती नदी रिचार्ज के लिए मैनेज्ड एक्वीफर रिचार्ज डिजाइन का ब्लूप्रिंट तैयार किया है। प्रस्ताव के मंजूरी के लिए नमामि गंगे परियोजना को भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही साइटों पर जमीन के भीतर सूखी नदी का जल स्तर बढ़ाने के लिए पायलट प्रोजेक्ट के तहत कार्य शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि उन्होंने इस परियोजना की लागत पब्लिक डोमेन में लाने से मना कर दिया है। यह परियोजना सफल होने पर गंगा बेसिन के जल प्रबंधन को मजबूत करेगी।
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विज्ञानी भूजल रिचार्ज की करेंगे मानिटरिंग

पौराणिक सरस्वती नदी की पुनर्जीवन के लिए प्रयागराज के बमरौली से लेकर कौशांबी, फतेहपुर और कानपुर तक लगभग 150 से अधिक स्थानों को चिन्हित किया गया है। नमामि गंगे के पायलट प्रोजेक्ट में छह स्थानों पर नदी की रिचार्ज मंजूरी मिलने पर विज्ञानी भूजल स्तर की मानिटरिंग करेंगे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि भूमिगत सरस्वती धारा के पुनर्जीवित होने के संकेत मिल रहे हैं या नहीं। भूजल स्तर बढ़ने के संकेत मिलने पर नमामि गंगे परियोजना के तहत सभी साइटों पर कार्य शुरू किया जाएगा।
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