खागा के निकट 15 मीटर नीचे मिट्टी में मिले निशान
एनजीआरआई की रिपोर्ट के अनुसार 15-25 मीटर और 25-50 मीटर गहराई में पश्चिम दिशा की ओर फतेहपुर के खागा के निकट दो मजबूत शाखाओं में 10-15 मीटर मोटी जलोढ़ मिट्टी की परत से दबी सरस्वती नदी पाई गई है। एक शाखा 15 मीटर मोटी 4-6 किलोमीटर चौड़ी होकर कानपुर के बिल्हौर तक गई है। वहीं, दूसरी मुख्य शाखा लोहगुरा गांव से दक्षिण की ओर मुड़ते हुए 160 किलोमीटर दूर गजनेर तक पहुंचती है। वैज्ञानिको की खोज से यह पता चला है कि एक बड़ी नदी के रूप में यह विशाल जल भंडार का स्रोत हुआ करती थी। जिसे रिचार्ज कर भू-जल भंडारण किया जा सकता है।
इससे भूजल की कमी को दूर किया जा सकता है। इसके लिए एनजीआरआई के विज्ञानी उत्तर प्रदेश भू-जल बोर्ड के साथ मिलकर गंगा और यमुना से प्राकृतिक रूप से जुड़ी सरस्वती नदी के पेलियो चैनल की साइटों के माध्यम से कौशाम्बी, फतेहपुर और कानपुर की छह स्थानों पर सरस्वती नदी रिचार्ज के लिए मैनेज्ड एक्वीफर रिचार्ज डिजाइन का ब्लूप्रिंट तैयार किया है। प्रस्ताव के मंजूरी के लिए नमामि गंगे परियोजना को भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही साइटों पर जमीन के भीतर सूखी नदी का जल स्तर बढ़ाने के लिए पायलट प्रोजेक्ट के तहत कार्य शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि उन्होंने इस परियोजना की लागत पब्लिक डोमेन में लाने से मना कर दिया है। यह परियोजना सफल होने पर गंगा बेसिन के जल प्रबंधन को मजबूत करेगी।
विज्ञानी भूजल रिचार्ज की करेंगे मानिटरिंग
पौराणिक सरस्वती नदी की पुनर्जीवन के लिए प्रयागराज के बमरौली से लेकर कौशांबी, फतेहपुर और कानपुर तक लगभग 150 से अधिक स्थानों को चिन्हित किया गया है। नमामि गंगे के पायलट प्रोजेक्ट में छह स्थानों पर नदी की रिचार्ज मंजूरी मिलने पर विज्ञानी भूजल स्तर की मानिटरिंग करेंगे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि भूमिगत सरस्वती धारा के पुनर्जीवित होने के संकेत मिल रहे हैं या नहीं। भूजल स्तर बढ़ने के संकेत मिलने पर नमामि गंगे परियोजना के तहत सभी साइटों पर कार्य शुरू किया जाएगा।