शिक्षामित्र से शिक्षक पद पर किया गया समायोजन निरस्त किए जाने से दुखी कौशाम्बी के 1451 शिक्षामित्र सोमवार को सड़क पर उतर आए। आक्रोशित शिक्षामित्रों ने डायट मैदान में धरना-प्रदर्शन किया। इसके बाद कलेक्ट्रेट पहुंचकर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को देते हुए मौत की इजाजत मांगी। ऐलान किया कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाया जाएगा और लड़ाई अंतिम दम तक लड़ी जाएगी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षक पद पर समायोजित किए गए शिक्षामित्रों के समायोजन की प्रक्रिया को अवैध करार दिया है। कोर्ट के इस फैसले से शिक्षामित्र आहत हैं, उनमें गुस्सा भी है। अदालत के निर्णय से भन्नाए जिले के शिक्षामित्रों ने सोमवार को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षामित्र संघ और शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के संयुक्त बैनर तले मुख्यालय स्थित डायट मैदान में करीब दो घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष रत्नाकर सिंह ने कहाकि उच्च न्यायालय के फैसले से देश के 1.72 लाख शिक्षामित्रों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उनके सामने आत्महत्या करने के सिवा और कोई चारा नहीं है। उन्होंने केन्द्र सरकार पर भी निशाना साधा। कहाकि केन्द्र सरकार भी शिक्षामित्रों के साथ दोहरा व्यवहार कर रही है।
शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सोमप्रकाश मिश्र ने कहाकि कोर्ट का निर्णय राजनीति से प्रेरित है। शिक्षामित्रों को अयोग्य ठहराने वाले तब कहां थे जब 15 सालों तक वे अल्प मानदेय पर काम कर रहे थे। अब पूरा मानदेय मिलने लगा तो बड़ी ही आसानी से अयोग्य कह दिया गया जबकि आठ हजार से ज्यादा फर्जी प्रशिक्षु पकड़े जाने के बाद भी टीईटी पास करने वालों को योग्य कहा जा रहा है। धरना-प्रदर्शन के बाद नारेबाजी करते हुए शिक्षामित्र कलेक्ट्रेट पहुंचे। वहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी अनिल कुमार सिंह को सौंपकर इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी। इस मौके पर विद्याचरण शुक्ल, इरशाद अहमद, नयनलाल, वीरेन्द्र केसरवानी, रामरुप, प्रवीण कुमार, नागेश्वर सिंह, सुधा देवी, पूनम, बनवारीलाल आदि मौजूद रहे।