टीकरडीह गांव के पिपरहाई तालाब में मिलती है पोताई के लिए उपयोगी सफेद मिट्टी
सुबह करीब छह बजे टीकरडीह गांव की महिलाएं और बेटियां घर सजाने का सपना लेकर अपने-अपने घरों से निकलीं थीं। तालाब की मिट्टी से पुताई करने पर घर नया हो जाता है। लेकिन टीला काल बन गया। पांच की मौत से कई घर उजड़ गए। सपने चकनाचूर हो गए।
टीकरडीह गांव में सोमवार सुबह हुए हादसे में पांच मौतों के बाद मंजर ही बदल गया। परिजनों की कारुणिक चीख-पुकार से गांव के हर घर में आंसू बह रहे हैं। हादसे की शिकार ममता और ललिता सगी देवरानी-जेठानी हैं। दोनों के पति ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करते हैं। दोनों बच्चों को घर पर छोड़कर कुछ देर में लौटकर आने की बात कहकर निकली थीं। बच्चे मां के आने का इंतजार कर रहे थे। मां नहीं आई, मौत की खबर पहुंची।
मृतका कछरही भी अपने बड़े बेटे सुग्गन और छोटी बहू मैना देवी के साथ मिट्टी खोदने तालाब गई थी। कछरही की मौत व बहू-बेटे के जख्मी होने से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। हादसे में जान गंवाने वाली खुशी ने हाईस्कूल और सुमन उर्फ उमा ने इसी साल इंटर की परीक्षा पास की थी। दोनों छात्राएं आगे के पढ़ाई की तैयारी कर रही थीं।
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चूने की तरह चमकती है मिट्टी
ग्रामीणों के मुताबिक, इस इलाके की सफेद मिट्टी कच्चे घरों की पुताई के बाद चूना की तरह चमक देती है। गांव समेत आसपास के ग्रामीण यहां मिट्टी निकालने आते हैं। वर्षों से मिट्टी निकालने के कारण भी तालाब के आसपास टीला बन गया।
आंखों देखी...अचानक भराभराकर ढहा टीला, फिर आंखों के सामने छा गया अंधेरा
घायल सुग्गन ने बयां की कहानी
फोटो नं-17
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। मां और भयाहू के साथ मिट्टी निकालने गए सुग्गन ने तालाब के अंदर ही अंदर खोदाई करने को हादसे का प्रमुख कारण बताया। टीले के नीचे लोग इस कदर दबे थे कि उन्हें बाहर निकालने में घंटों तक मशक्कत करनी पड़ी। बोले कि अचानक टीला ढहने के बाद आंखों के सामने अंधेरा छा गया था। टीले के नीचे दबने से उसका सिर फट गया था।
घायल सुग्गन ने बताया कि सोमवार सुबह सभी लोग घर की पोताई के लिए मिट्टी खोदने पिपरहाई तालाब गए थे। वह और उसकी भयाहू मैना देवी व पड़ोस की लखनी और सपना बाहरी हिस्से की तरफ खोदाई कर रहे थे, इसलिए वह लोग बच गए। जबकि, उसकी मां समेत अन्य चट्टान के अंदर मिट्टी निकाल रही थीं।
टीला ढहा तो सभी दब गए थे। कुछ देर बाद वह संभला तो पहले अपनी मां और भयाहू की तलाश की। बाहरी हिस्से में होने के कारण भयाहू मैना को बाहर निकाल लिया। वहीं, भीतरी हिस्से में होने के कारण वृद्ध मां का सिर्फ खून से लथपथ हाथ दिख रहा था। इस पर उसने शोर मचाकर ग्रामीणों को बुलाया। ग्रामीण मौके पर पहुंचते कि इससे पहले वह बेसुध होकर गिर पड़ा। आठ घंटे बाद होश आने पर खुद को अस्पताल में पाया।
हादसे में घायल आक्रोश उर्फ सुग्गन।- फोटो : साइलेंसरों पर चलता बुलडोजर।
हादसे में घायल आक्रोश उर्फ सुग्गन।- फोटो : साइलेंसरों पर चलता बुलडोजर।