कारखाने में कपड़ों की सिलाई करती महिलाएं। स्रोत: स्वयं
करारी क्षेत्र के पिंडरा सहबानपुर गांव की शबनम बेगम ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर शुरू किया गया। दो सिलाई मशीन से कारोबार की नींव रखी। वर्तमान में वह सिलाई सेंटर पर 25 मशीन से करीब 25 लोगों को रोजगार दे रही हैं।
पिंडरा सहबानपुर निवासी शबनम बेगम ने वर्ष 2017 में स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने काम की शुरुआत की। उनके पति शकील अहमद ने बताया कि शुरुआत में शबनम ने समूह से लोन लेकर दो सिलाई मशीन खरीदी थी। दोनों ने कपड़ा सिलाई का काम शुरू किया। इसी दौरान एक प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य के सहयोग से उन्हें स्कूली बच्चों की ड्रेस सिलने का काम मिला।
धीरे-धीरे काम बढ़ने लगा और उन्होंने दो से छह मशीनें हो गईं। इसके साथ ही उन्होंने अन्य समूह की महिलाओं को काम पर रखना शुरू किया और उन्हें मासिक 6000 रुपये तक का भुगतान करने लगीं।
काम में तेजी आने पर उन्होंने एक बड़ा सिलाई सेंटर स्थापित किया। इसमें 25 सिलाई मशीन लगाई गई हैं। उन्होंने आसपास की महिलाओं को रोजगार से जोड़ा। कुछ महिलाएं कारखाने में काम करती हैं, जबकि कई महिलाएं घर से ही कपड़े सिलकर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं।
शकील ने बताया कि बीच में जब स्कूली ड्रेस का पैसा सीधे छात्रों के खातों में जाने लगा तो उनके काम पर असर पड़ा। इसके बाद उन्होंने अधिवक्ताओं के ड्रेस सिलने का काम शुरू किया और धीरे-धीरे व्यवसाय को फिर से पटरी पर लाया।
आज उनका काम जिले के साथ-साथ प्रयागराज तक फैल चुका है। शकील अहमद मार्केटिंग और ऑर्डर सप्लाई की जिम्मेदारी संभालते हैं। शबनम बेगम के इस प्रयास से न केवल उनका परिवार आत्मनिर्भर बना है, बल्कि करीब 25 परिवारों को भी रोजगार मिला है।
कारखाने में कपड़ों की सिलाई करती महिलाएं। स्रोत: स्वयं