रामपुर धमावां गांव की समूह सखी डाली ने संघर्षों के बीच न सिर्फ अपने परिवार की जिम्मेदारियां संभालीं, बल्कि गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का बीड़ा भी उठाया। छह साल पहले राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर डाली ने अब तक 26 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया।
करीब 14 वर्ष पहले माता-पिता के बीच विवाद के बाद पिता परिवार से अलग हो गए। इसके बाद मां गीता देवी दो बेटों और बेटी डाली के साथ मायके में रहने लगीं। मेहनत-मजदूरी कर मां ने डाली को स्नातकोत्तर तक पढ़ाया।
वर्ष 2020 में वह मां शीतला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह की बचत और बैंक से मिले ऋण की मदद से चिप्स और पापड़ बनाने का काम शुरू किया। बेहतर कार्य और सक्रियता को देखते हुए वर्ष 2021 में उन्हें समूह सखी की जिम्मेदारी सौंपी गई।
इसके बाद उन्होंने गांव की महिलाओं को जागरूक कर दुर्गा माता, उर्वशी, लक्ष्मी, भोलेनाथ, बाबा साहब समेत 26 स्वयं सहायता समूहों का गठन कराया। भाइयों की पढ़ाई के लिए डाली प्रतिमाह पांच हजार रुपये दे रही हैं।
इन समूहों से जुड़कर शीला देवी ने ब्यूटी पार्लर, माया देवी ने कॉस्मेटिक की दुकान और सरोज देवी ने लिफाफा बनाने का व्यवसाय शुरू कर आर्थिक स्थिति मजबूत की है।
रामपुर धमावां गांव की समूह सखी डाली ने कम समय में 26 स्वयं सहायता समूहों का गठन कर महिलाओं को जागरूक करते हुए आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई है। - महेंद्र कुमार, एडीओ आईएसबी, विकासखंड सिराथू