जिले की सहकारी समितियां किसानों को केवल खाद उपलब्ध करा रही हैं, जबकि बीज के वितरण की सुविधा पूरी तरह बंद हो गई है। यदि समितियों से बीज मिले, तो किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने समितियों से बीज वितरण की व्यवस्था दोबारा शुरू करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इससे किसानों को तहसील मुख्यालय स्थित बीज गोदामों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और बीज गांव के आसपास ही मिल सकेगा।
जिले में कुल 64 सहकारी समितियां संचालित हैं। इन समितियों में अब तक डीएपी, यूरिया और एसएसपी (सिंगल सुपर फॉस्फेट) खाद का ही वितरण होता है। पिछले कुछ वर्षों में नैनो यूरिया भी उपलब्ध की जा रही है।
भाकियू (अराजनैतिक) के जिलाध्यक्ष नूरूल इस्लाम ने कहा कि यदि समितियां पूरी तरह सक्रिय होती हैं, तो किसानों को एक ही स्थान से खाद, बीज और अन्य कृषि सामग्री मिल सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जिन किसानों का समितियों में पंजीकरण हैं। कृषि विभाग उनको किसान मानते हुए अपने यहां स्वत: पंजीकरण करें। इससे किसानों को पहले समिति और फिर कृषि विभाग में पंजीकरण नहीं कराना होगा।
सचिव भी चाहते हैं बांटे जाएं बीज
सहकारी समितियों के सचिव और कर्मचारी किसी प्रकार का मासिक मानदेय नहीं पाते, उन्हें केवल बिक्री पर कमीशन मिलता है। उप्र साधन सहकारी समिति संगठन के जिला महामंत्री बृजेश कुमार शुक्ला ने बताया कि कभी-कभी पीसीएफ की ओर से गेहूं का बीज भेजा जाता है जिसे समिति के माध्यम से वितरित किया जाता है। अधिकांश किसानों को इसकी जानकारी नहीं होती इसलिए वे बीज की मांग ही नहीं करते। उन्होंने कहा कि जितनी अधिक सामग्री समिति से वितरित होगी, सचिवों को उतना ही अधिक कमीशन मिलेगा। इसलिए सभी सचिव चाहते हैं कि कृषि विभाग समितियों के माध्यम से बीज वितरण की व्यवस्था फिर शुरू करे।
किसानों की राय
-किसानों को बीज और खाद चाहिए। जहां मिलेगी, वहीं से लाएंगे। यदि सुविधा अपने घर के आसपास मिले तो बेहतर रहेगा। - भैया लाल राजपूत, किसान
- बोआई और कटाई के दौरान किसानों के पास कम समय होता है। यदि घर के आसपास बीज और खाद उपलब्ध हो तो वे निजी दुकानदारों के शोषण से भी बच जाएंगे। - रोहित शुक्ला, किसान
- समितियों को विभाग से बीज नहीं दिया जा रहा है। कारण स्पष्ट नहीं है लेकिन 2012 तक समितियों को बीज मिलता था। लगभग 2017 के आसपास यह प्रक्रिया बंद हुई। अब इसे दोबारा शुरू करने की तैयारी चल रही है। समिति के किसानों को स्वत: कृषि विभाग में पंजीकरण का मुद्दा विभागीय बैठक में उठाया जाएगा। - सत्येंद्र तिवारी, डीडी कृषि
- विभाग समितियों के माध्यम से बीज वितरण के पक्ष में है। किसानों की ओर से मांग नहीं होने के कारण सचिव बीज की मांग नहीं करते। जब किसान बीज की मांग करेंगे, तभी समितियों को बीज उपलब्ध कराया जाएगा।- श्रीशंकर द्विवेदी, डिप्टी एआर कोऑपरेटिव
साधन सहकारी समिति मंझनपुर। संवाद
साधन सहकारी समिति मंझनपुर। संवाद