धान की रोपाई के वक्त किसानों के नलकूपों में लगे ट्रांसफार्मर दगा देने लगे हैं। चार दिन हुई बारिश के दौरान तीन दर्जन से अधिक नलकूपों के ट्रांसफार्मर फुंक गए। इसके अलावा डेढ़ दर्जन गांवों के ट्रांसफार्मर भी नहीं बदले जा सके। इसके पीछे वर्कशॉप से ट्रांसफार्मरों की मरम्मत पेंडेंसी के मुताबिक न होना प्रमुख कारण है। इससे लोगों के घरों में तो अंधेरा छाया ही है खेती-किसानी का काम भी बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है।
जुलाई का महीना धान की रोपाई के लिए सबसे मुफीद माना जाता है। इस महीने में किसान 80 फीसदी धान की रोपाई का काम कर लेता है। मगर खरीफ की प्रमुख खेती के मौके पर किसानों के नलकूपों में लगे ट्रांसफार्मर दगा दे रहे हैं। स्टोर में 25 केवीए के ट्रांसफार्मरों की पेंडेंसी पर नजर डालें तो संख्या 38 पहुंच चुकी है। ऐसे में दोआबा के 38 किसानों के नलकूप धान रोपाई के ऐन वक्त पर ठप हो गए हैं। वर्कशॉफ के जिम्मेदार हैं कि वह पर्याप्त मात्रा में ट्रांसफार्मरों की मरम्मत नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते 25 केवीए के ट्रांसफार्मरों की पेंडेंसी लगातार बढ़ती जा रही है। बानगी के तौर पर म्योहर गांव के नलकूप उपभोक्ता जय नारायन मिश्र को लिया जा सकता है।
इनके नलकूप का ट्रांसफार्मर सप्ताह भर पहले फुंक गया था। जिम्मेदार हैं कि आज तक ट्रांसफार्मर नहीं बदल सके। यही हाल घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली मुहैया कराने वाले ट्रांसफार्मरों का है। स्टोर के आंकड़ों पर जाएं तो अफजलपुरवारी, पइंसा, पुरखास सहित 19 गांवों में लगे ट्रांसफार्मर फुंकने के बाद स्टोर में जमा हो चुके हैं लेकिन उन्हें आज तक महकमे के जिम्मेदार नहीं बदल सके। इसमें 63 केवीए के 8, सौ केवीए के दो और दस केवीए के नौ ट्रांसफार्मर शामिल हैं।
ट्रांसफार्मर न बदले जाने से इन गांवों में कई दिनों से अंधेरा है। ट्रांसफार्मर लेने के लिए नलकूप और संबंधित गांवों के उपभोक्ता रोज स्टोर का चक्कर काट रहे हैं लेकिन स्टोर से जॉब न निकलने के कारण घरेलू और नलकूप ट्रांसफार्मरों की पेंडेंसी लगातार बढ़ती जा रही है। वर्कशॉप की लापरवाही के चलते धान की रोपाई तो पिछड़ ही रही है। बारिश के मौसम में लोगों को बगैर बिजली के रहना पड़ रहा है। इसे लेकर उपभोक्ताओं में जिम्मेदारों के प्रति नाराजगी है।
घटिया निर्माण के चलते फुंक जाते हैं ट्रांसफार्मर
मंझनपुर स्थित वर्कशॉप में सभी प्रकार के ट्रांसफार्मरों की मरम्मत की सुविधा उपलब्ध है। विभाग ने छोटे और बड़े ट्रांसफार्मरों के लिए अलग-अलग वर्कशॉप बना रखा है लेकिन निर्माण में लगने वाली सामग्री की घटिया आपूर्ति की जा रही है। तेल हो या वायर सब कुछ घटिया किस्म का भेजवाया जाता है। इसके चलते मरम्मत के बाद ट्रांसफार्मर जल्द ही फुंक जाता है। कुछ ट्रांसफार्मर तो लगाने के तत्काल बाद ही फुंक जाते हैं। बानगी के तौर पर अफजलपुरवारी, पुरखास और पइंसा में भेजे गए सौ-सौ केवीए के ट्रांसफार्मर चार दिन भी नहीं चल सके। यही हाल पइंसा गांव में लगवाए गए 63 केवी ट्रांसफार्मर का रहा। लगाने के कुछ घंटों बाद ट्रांसफार्मर फुंकने से नाराज ग्रामीणों ने इन्हें वर्कशॉप में जमा करा दिया पर दूसरा नहीं मिल सका। इसके चलते इन गांवों में अंधेरा छाया हुआ है।
कभी तेल तो कभी मेगर न आने बताई जा रही समस्या
मंझनपुर वर्कशॉप के ठेकेदार द्वारा ट्रांसफार्मरों की मरम्मत में घोर लापरवाही बरती जा रही है। वर्कशॉप के कर्मचारी मरम्मत की खामी को कभी तेल न होने की बात कहकर छिपाते हैं तो कभी बने हुए ट्रांसफार्मरों में मेगर की समस्या बताते हैं। इसके चलते जरूरत के मुताबिक वर्कशॉप से ट्रांसफार्मरों की खेप स्टोर नहीं पहुंच पाती। यही कारण है कि लगातार ट्रांसफार्मरों की पेंडेंसी बढ़ती जा रही है।
बारिश के दिनों में मॉश्च्युराइजर के चलते मेगर कम आ पाता है। मेगर आने के लिए 24 घंटे बिजली का रहना जरूरी होता है। मंझनपुर में बिजली की समस्या बराबर बनी रहती है। बढ़ रही पेंडेंसी को इलाहाबाद से ट्रांसफार्मर भेजवाकर एक-दो दिन में दूर करवा दिया जाएगा।
सैय्यद तारिक जलील, एक्सईएन वर्कशॉप