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खोले जाएं स्कूल, शारीरिक दूरी के साथ होगी पढ़ाई

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खोले जाएं स्कूल, शारीरिक दूरी के साथ होगी पढ़ाई
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निजी स्कूल प्रबंधकों की तरफ से सोशल साइट पर दिए जा रहे विकल्प
बच्चों की शिफ्टवार क्लास संचालित किए जाने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। लॉकडाउन के कारण बेरोजगार हुए शिक्षकों व निजी स्कूल प्रबंधकों के सामने अब रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पांच महीने से स्कूल बंद होने के कारण स्कूल प्रबंधन इस साल की फीस भी नहीं वसूल सके हैं। बच्चों को अपने स्कूल से जोड़े रखने के लिए ऑनलाइन क्लास चलाने का संकट है सो अलग। अब शिक्षक व स्कूल प्रबंधनों ने सोशल साइट पर ग्रुप बनाकर व्यापार की तर्ज पर स्कूल खोले जाने की मांग कर रहे हैं। ग्रुप में सुझाव दिए गए हैं कि जिस तरह से अनलॉक में शारीरिक दूरी का ख्याल रखते हुए कारोबार को खोला गया उसी तर्ज पर स्कूलों का संचालन कराया जाए। यह भी कहा जा रहा है छात्रों को शिफ्ट में बुलाकर शिक्षक पढ़ाने के लिए तैयार हैं।
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जिले भर में तकरीबन पौने पांच सौ माध्यमिक स्कूल, पांच सौ से ज्यादा कॉन्वेंट व सैकड़ों कोचिंग सेंटर हैं। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस को लेकर 23 मार्च से लागू लॉकडाउन के कारण सारे शिक्षण संस्थान बंद है। अप्रैल में सत्र चालू होने पर संस्थान कम से कम तीन महीने की फीस बच्चों से वसूल लेते थे। इसके अलावा तमाम तरह के शुल्क लिए जाते थे। इसी से स्कूल का खर्च निकाला जाता है। अप्रैल में स्कूल बंद होने के कारण प्रबंधन फीस वसूल नहीं कर सका। सरकार ने पिछले दिनों अनलॉक के तहत कारोबार व परिवहन को छूट दी, लेकिन स्कूल खोले जाने के बाबत फैसला नहीं हुआ। नतीजतन जिले में निजी स्कूलों के हजारों शिक्षक बेरोजगार हो गए हैं। ज्यादातर प्रबंधनों ने शिक्षकों से मुंह तक फेर लिया है। कुछ ही नामचीन स्कूल ऐसे हैं, जिन्होंने अपने यहां पढ़ाने वाले शिक्षकों को आधी पगार दी। अब वह लोग भी हाथ खड़े करते नजर आ रहे हैं। इसे लेकर अब सोशल साइट पर शिक्षकों, प्रबंधकों ने स्कूल खोले जाने का विकल्प साझा किया है। धर्मा देवी इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. रामकिरण त्रिपाठी का कहना है उन लोगों ने प्राइवेट स्कूल संचालकों का ग्रुप बनाया है। जिसमें स्कूल किस तरह से खोले जाएं, इस बाबत सुझाव मांगे जा रहे हैं। ज्यादातर स्कूल प्रबंधकों का कहना है वह अपने बच्चों को शिफ्ट में पढ़ाने के लिए तैयार है। कोरोना को लेकर सारे सुरक्षा मानक अपनाएं जाएंगे। धनपत्ती देवी श्याम नारायण इंटर कॉलेज के प्रबंधक वीरेंद्र पांडेय का कहना है सरकार को विचार करना चाहिए की जब स्कूल नहीं खुलेंगे तो प्रबंधतंत्र शिक्षकों को पगार कहां से देंगे। एक तरफ सरकार प्रवासियों को रोजगार दिलाने की बात कह रही है वहीं महीनों से बेरोजगार शिक्षकों की तरफ ध्यान तक नहीं दिया जा रहा है। जय मां दुर्गे इंटर कॉलेज अजुहा के प्रबंधक प्रदीप त्रिपाठी का कहना है कि निजी स्कूल में पढ़ाने वाले तमाम शिक्षक पगार से खुद की पढ़ाई भी करते हैं। उन लोगों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। कमोवेश कुछ ऐसे ही तर्क केएस इंटर कॉलेज कानेमई, कमला इंटर कॉलेज मढियामई, पूजा इंटर कॉलेज अमिरतापुर के प्रबंधकों का था। इनका कहना है जल्द ही वह लोग अपने संगठन के जरिए सरकार तक यह सुझाव पहुंचाएंगे।
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