विधानसभा चुनाव की तैयारियों ने स्कूलों की सच्चाई सबके सामने रख दी है। स्कूलों में नौनिहालों के लिए न तो पेयजल का इंतजाम है, न ही शौचालय का। इसके अलावा तीन सौ से अधिक ऐसे विद्यालय हैं जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंच सकी है। ये सभी स्कूल बूथ बनाए जाएंगे। बीएसए ने इसकी रिपोर्ट भेजी तो अधिकारियों ने चाबुक चला दिया है। साथ ही फरमान जारी किया गया है कि जल्द से जल्द स्कूलों को सुविधाओं से लैस किया जाए।
परिषदीय विद्यालयों की स्थिति दयनीय है। ये हम नहीं बल्कि बीएसए की रिपोर्ट कह रही है। सैकड़ों ऐसे स्कूल हैं, जहां पेयजल का इंतजाम नहीं था। स्वच्छता मिशन का दावा करने वाले अधिकारियों ने भी स्कूलों की अनदेखी की है। स्कूलों में शौचालय तक नहीं थे, जो बने हैं, वह उपयोग के लिए लायक नहीं थे। चुनाव नजदीक आया तो बूथ बनाने की कवायद शुरू की है। डीएम ने बीएसए से रिपोर्ट मांगी तो उन्होंने यह चौंकाने वाली रिपोर्ट भेज दी। इसे डीएम ने गंभीरता से लेते हुए राज्य वित्त से इन स्कूलों में पेयजल, शौचालय व विद्युतीकरण कराने का निर्देश जारी किया है। चुनावी तैयारी में कहीं कोई खामी न रह जाए, इसलिए अधिकारियों ने इन स्कूलों में व्यवस्था शुरू कर दी है। जल निगम के एक्सईएन से प्रस्ताव मांगा गया है तो शौचालय बनवाने व उनको दुरुस्त कराने की जिम्मेदारी पंचायत सचिवों के हवाले कर दी गई है।