कस्बे में एक वित्त विहीन शिक्षण संस्थान के अधिकांश भवन तालाब की भूमि पर अतिक्रमण कर बनाए गए हैं। आरोप है कि स्थानीय राजस्व अधिकारी सब कुछ जानने के बाद भी खामोशी अख्तियार किए रहते हैं। अधिकारियों की इस भूमिका को लेकर तमाम तरह के सवाल उठने लगे हैं।
कस्बे के एक शिक्षा माफिया पर आरोप है कि उसने अपने शिक्षण संस्थान से लगी तालाब की भूमि पर अतिक्रमण कर उसका अस्तित्व ही खत्म कर दिया है। तालाब की भूमि पर बड़े-बड़े कमरे बने हुए हैं। शिक्षण संस्थान शैक्षणिक माहौल बनाने के बजाए धन कमाने के अड्डे में तब्दील हो रहा है। जानकाराें का कहना है कि इस शिक्षण संस्थान में कई कमराें का नियमों के विपरीत व्यवसायिक उपयोग भी खुलेआम किए जाने की शिकायत है।