भाजपा के चौंकाने वाले प्रदर्शन से बसपा व सपा के पदाधिकारियों में हताशा है। सबसे ज्यादा नुकसान बसपा को हुआ है। इससे बसपा के पदाधिकारी सकते में हैं। कहां, कैसे चूक हुई, इसको लेकर मंथन शुरू हो गया है। भीतरघातियों ने बसपा व सपा को तगड़ी चोट दी है। इससे पदाधिकारी भी वाकिफ हैं। अब वह ऐसे कार्यकर्ताओं को ढूंढ़ने में जुटे हैं, जिन्हाेंने घर में रहकर बाहरी की मदद की। हालांकि ऐसे लोगों की लंबी फेहरिश्त है।
विधानसभा चुनाव हारने के बाद बसपा के पदाधिकारियों ने भीतरघात करने वालों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है। रविवार को मोबाइल के जरिए एक-एक कार्यकर्ता की गतिविधि टटोली गई। सबसे ज्यादा उन बूथों पर कार्यकर्ताओं की गतिविधि खंगाली गई, जहां से बसपा हारी। यह काम मंझनपुर विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा हो रहा है। मंझनपुर से बसपा जीतने में कामयाब रही, लेकिन जैसे ही वह मंझनपुर नगर पंचायत की सीमा से बाहर निकली तो उसकी लड़ाई बीजेपी से शुरू हो गई थी। एक-एक बूथ का डाटा तैयार हो रहा है। यही काम सपा में भी जारी है। फिलहाल तो सपाई अभी खामोश हैं। कई भीतरघाती चिह्नित भी हो गए हैं। इनमें बड़े नाम भी शामिल हैं। ऐसा उन्होंने क्यों किया? इसको लेकर सवाल भी जरूर बना है। पूर्व मंत्री इंद्रजीत सरोज को सबसे ज्यादा झटका लगा है।
सपा-बसपा की बैठक में हो सकता है हंगामा
मंझनपुर। चुनाव परिणाम आने के बाद बसपा व सपा में निराशा है। हाल ही में इन दोनों पार्टियों की समीक्षा बैठक होगी। दोनों दलों की बैठक में हंगामा होने के आसार है। हार से बौखलाए पदाधिकारी व कार्यकर्ता एक दूसरे पर तीखा आरोप लगा सकते हैं। ऐसी स्थिति बनने की संभावना है। यदि ऐसा हुआ तो बात बनने के बजाय बिगड़ेगी जरूर, यदि पार्टियां कोई नई रणनीति के तहत समीक्षा बैठक करेगी तो कइयों को बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है।
राजनीतिक दलों में तेज होगी भगदड़
जून माह में निकाय चुनाव संभावित है। इसके अलावा नई सरकार की निगाह ब्लाकों व जिला पंचायत पर होगी। इसको देखते हुए राजनीतिक दलों में शामिल लोग अपनी प्रतिष्ठा बचाए रखने के लिए सपा व बसपा का दामन छोड़ भाजपा की शरण में जा सकते हैं। आने वाले चुनावों के मद्देनजर भी भाजपा से लाभ लेने के लिए सपा-बसपा को बॉय-बॉय कह सकते हैं।