शासन स्तर से आठ साल पहले बंद हो चुकी साक्षर भारत मिशन योजना के लंबित मानदेय भुगतान के लिए रिपोर्ट मांगी गई है। विभाग फिर से पुराने दस्तावेज खंगालने में जुट गया है। ऐसे में मिशन प्रेरकों में एक बार फिर मानदेय भुगतान की उम्मीद जगी है।
साक्षरता, वैकल्पिक शिक्षा, उर्दू एवं प्राच्य भाषा विभाग के निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने जिले में पत्र भेजकर साक्षर भारत मिशन के कर्मचारियों की जानकारी मांगी है। इसके बाद डायट स्तर पर रिकार्ड तलाशने की कवायद तेज हो गई है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि योजना काफी पुरानी है, इसलिए सटीक आंकड़े जुटाने में समय लग रहा है।
साक्षरता वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा के मुताबिक योजना में जिले में जिला स्तर पर एक कोऑर्डिनेटर, ब्लॉक स्तर पर ब्लॉक कोऑर्डिनेटर और ग्राम पंचायत स्तर पर दो-दो प्रेरक तैनात किए गए थे। जिला व ब्लॉक कोऑर्डिनेटर को छह-छह हजार रुपये प्रतिमाह और प्रेरकों को दो-दो हजार रुपये मानदेय दिया जाना था।
यह योजना वर्ष 2014 से 2018 तक संचालित रही। कर्मियों के मुताबिक इस बीच सभी को एक साथ कभी मानदेय नहीं मिला। इनके अनुसार जिले के करीब 902 प्रेरकों का मानदेय अब तक बकाया है। उनका दावा है कि प्रत्येक प्रेरक का लगभग 50 हजार रुपये, ब्लॉक कोऑर्डिनेटर का करीब दो लाख और जिला कोऑर्डिनेटर का एक लाख रुपये तक बकाया है।
डायट प्राचार्य निधि शुक्ला ने बताया कि फिलहाल पुराने रिकार्ड निकाले जा रहे हैं। गणना पूरी कर शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।