कौशाम्बी ब्लॉक के कई गांव ऐसे हैं, जहां बुद्ध के पांव पड़े। कोसम इनाम गांव में उन्होंने प्रवास किया था। यह पूरा क्षेत्र प्रदेश के पर्यटन नक्शे में शामिल है। देश-विदेश से हजारों बुद्ध के अनुयायी हर साल यहां आते हैं। बावजूद इसके यहां तक पहुंचने का कोई सरकारी इंतजाम नहीं है।
कौशाम्बी जिला बने 29 साल बीत चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी अभी तक यातायात सुविधा डग्गामर वाहनों, ई-रिक्शा के भरोसे है। मंझनपुर मुख्यालय से मात्र 11 किलोमीटर दूर इस करारी कस्बे से होकर लोग चित्रकूट, प्रयागराज, प्रतापगढ़ आते-जाते रहते हैं। भगवान बुद्ध की तपस्थली जाने के लिए टूरस्टि बसें आती हैं। प्रयागराज आने वाले तीर्थ यात्री बुद्ध की तपस्थली भी आते हैं। ऐसे में निजी वाहन का ही सहारा लेना पड़ता है। निजी वाहन चालक भी मजबूरी का फायदा उठाते हुए मनमाना किराया वसूल करते हैं।
अक्सर अमावस्या को राजापुर-चित्रकूट जाता हूं। करारी से कोई रोडवेज बस न चलने से मजबूरी में निजी साधन करके आवागमन करना पड़ता है। करारी से पश्चिमशरीरा होते हुए चित्रकूट के लिए एक रोडवेज बस चल जाए तो सहूलियत होगी। - गणेश चौरसिया
कौशाम्बी ब्लॉक में तथागत की तपस्थली है। देश-विदेश से प्रतिदिन लोग यहां आते रहते हैं। मंझनपुर व करारी से निजी या रोडवेज बस नहीं जाती। मजबूरन लोगों को ऑटो या ई-रिक्शा बुक कर आना जाना पड़ता हैं। - देशराज चौधरी
पहले सुविधा की गई थी, लेकिन सवारियों के न मिलने की वजह से बस सेवा रोक दी गई थी। लोगों की मांग पर क्षेत्रीय डिपो इंचार्ज से क्षेत्र का सर्वे कराकर दोबारा बस सेवा शुरू की जाएगी। - जयकरन प्रजापति, एआरएम रोडवेज, प्रयागराज।
गणेश चौरसिया करारी