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आधे घंटे की बारिश में सड़कें बन गईं तालाब

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Roads become ponds in half an hour of rain - फोटो : KAUSHAMBI
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आधे घंटे की बारिश में सड़कें बन गईं तालाब
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मंसूरनगर से नेतानगर, नेहरू नगर तक जाने वाली सड़क बन गई तालाब, बढ़ी लोगों की परेशानियां
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। रविवार दोपहर करीब आधे घंटे की बरसात ने मंझनपुर के कई मोहल्लों में जलनिकासी की पोल खोल दी। मंसूरनगर से नेतानगर, नेहरू नगर तक जाने वाली सड़क तालाब बन गई। अमर उजाला में कस्बे में जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने को लेकर चार जुलाई के अंक में प्रमुखता से खबर छपी थी। इसके बाद भी उचित व्यवस्था नहीं की गई।
जिला मुख्यालय मंझनपुर को नगर पालिका का दर्जा मिला है। मुख्यालय बनने के बाद यहां की जमीनें महंगी हो गईं। नतीजतन लोगों ने सार्वजनिक तालाबों को पाट कर घर बनाना शुरू कर दिया। राजस्व विभाग की मिलीभगत के कारण मुख्यालय के आधा दर्जन से ज्यादा तालाब वजूद खो चुके हैं। तालाबों पर लोगों के घर बने हुए हैं। इसकी वजह से तीन.चार वर्ष से हर साल बरसात होने पर यहां जलभराव की समस्या हो जाती है। पिछले साल नया नगर में वाटर पंप लगाकर बरसात का पानी निकलवाना पड़ा था। कई मोहल्ले में जेसीबी से सड़क कटवाई गई। इसके बाद भी तालाबों से अतिक्त्रस्मण हटवाने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया गया। नगर पालिका की सबसे बड़ी इस समस्या को लेकर अमर उजाला ने चार जुलाई के अंक में प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद अतिक्त्रस्मण हटवाने के साथ ही जल निकासी के समुचित प्रबंध का दावा किया गया थाए लेकिन रविवार की दोपहर करीब आधे घंटे के लिए झमाझम बरसात हुई तो कर्बला के पास की सड़क तालाब बन गई। सड़क पर एक फिट से ज्यादा पानी जमा हो गया। जिला अस्पताल परिसर में भी पानी भर गया। साधन सहकारी समिति व कोतवाली परिसर में जलभराव हो गया। इसके अलावा आजाद नगर और मंसूर नगर मोहल्ले में घरों में बरसाती पानी घुस गया। इसे लेकर कस्बे के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ऐसे में यदि मूसलाधार बारिश हुई तो परेशानियां बढ़ सकती हैं।?
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बताया जाता है कि जिला बनने के बाद मुख्यालय की जमीन पर असरदार व दबंगों का कब्जा होने लगा। मानक ताक पर रखकर लोगों ने प्लाटिंग कर दी। सड़क नाली का इंतजाम भी नहीं कराया। तलाबों पर कब्जा होने के साथ ही बस्ती भी कई आबाद हो गई। पिछले दिनों मुख्यालय की एक शत्रु संपत्ति पर कब्जा होने का मामला विधानसभा में भी उठा था। इसकी जांच सिराथू एसडीएम से कराई गई। जांच के दौरान पता चला कि जमीन पर कब्जा है और लेखपाल व कानूनगो ने जमीन कब्जा मुक्त होने की झूठी रिपोर्ट दी थी। इस पर लेखपाल व कानूनगो को सस्पेंड कर दिया गया था।
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