करारी कस्बे से शाहपुर गांव तक की सड़क का चौड़ीकरण होना है। अभी यह सड़क 3.75 मीटर की है। अब यह सड़क सात मीटर चौड़ी बनाई जानी है। निर्माण के लिए बजट चार महीने पहले ही स्वीकृत हो चुका है। पश्चिमशरीरा से शाहपुर तक सड़क का चौड़ीकरण हो चुका है। बाकी जगहों पर काम चल रहा है। हालांकि अभी मकानों को कहीं भी गिराया नहीं जा रहा है।
खाली जगहों पर ही सड़क चौड़ी की जा रही है। लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंता ध्रुवेंद्र भूषण ने बताया कि दोनों तरफ पटरी से सवा चार-चार फीट की परिधि में बने मकान ढहाए जाएंगे। घर गिरने को लेकर करारी के नागरिक सहमे हुए हैं। ध्वस्तीकरण हुआ तो कस्बे के तकरीबन 100 मकान गिरेंगे।
कइयों के पास सिर छिपाने की भी जगह नहीं बचेगी। करारी वालों के लिए सड़क चौड़ीकरण इस वक्त की सबसे बड़ी समस्या है। शुक्रवार को ‘अमर उजाला’ ने इस मुद्दे पर नगरवासियों से बात की तोसभी का एक ही कहना था कि बाईपास बना दिया जाए। इससेे किसी का कोई नुकसान नहीं होगा। कई परिवार बेघर होने से बच जाएंगे।
बाईपास का विकल्प है तो नागरिकों को परेशानी में डालना ठीक नहीं है। पीडब्ल्यूडी को चाहिए कि बाईपास का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजे। लोगों की समस्या से सरकार को अवगत कराया जाए, ऐसा नहीं है कि लखनऊ में बैठे अधिकारी विचार नहीं करेंगे।
संजय केसरवानी
चौड़ीकरण के बाद लोगों के घरों की कीमत बढ़ जाएगी, यह बात बिल्कुल सही है। मगर जिनके पास सिर छिपाने की जगह नहीं बचेगी, उनका क्या होगा। या तो बाईपास बनाया जाए या फिर मुआवजा दिया जाए।
जगदीश केसरवानी
ध्वस्तीकरण हुआ तो कई लोगों के मकान खंडहर हो जाएंगे। कुछ ऐसे भी परिवार हैं, जिनके पास दो जून की रोटी तक का संकट है। वह अपने घर को फिर से कैसे ठीक कराएंगे। शासन को पहले इस पर विचार करना होगा। इसके बाद आगे कोई काम करना होगा।
पंकज शर्मा
किसी भी कीमत पर मकानों का ध्वस्तीकरण नहीं होने दिया जाएगा। इसका हर स्तर पर विरोध होगा। जरूरत पड़ी तो कलक्ट्रेट से लेकर विधानसभा तक धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। नागरिकों को परेशान होने की जरूरत नहीं है।
इम्तियाज सल्मानी-सभासद
बाईपास का विकल्प है तो सार्वजनिक लोक निर्माण विभाग के अफसरों से बातचीत की जाएगी। लोगों की सहूलियत का पूरा ध्यान रखा जाएगा। जरूरत पड़ी तो शासन स्तर पर पैरवी की जाएगी।
लाल बहादुर, विधायक, मंझनपुर