भीषण गर्मी और उमस का असर अब गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी साफ दिखाई देने लगा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में डिहाइड्रेशन, चक्कर आने और पेट संबंधी संक्रमण की शिकायत लेकर पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।
जिला अस्पताल के स्त्री रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. विशाखा दीक्षित ने बताया कि उनकी ओपीडी में प्रतिदिन करीब 200 मरीज पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या गर्भवती महिलाओं की होती है। वर्तमान में प्रतिदिन 30 से 40 महिलाएं डिहाइड्रेशन और करीब 35 से 40 महिलाएं चक्कर आने की शिकायत लेकर उपचार के लिए पहुंच रही हैं।
डॉ. दीक्षित के अनुसार बढ़ती गर्मी में महिलाएं पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पी रही हैं, जिसके कारण शरीर में पानी की कमी हो रही है। इसके अलावा पेट में संक्रमण से संबंधित मामलों में भी वृद्धि दर्ज की जा रही है।
हर तीन घंटे में कुछ न कुछ जरूर खाएं
डॉ. दीक्षित ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को हर तीन घंटे के अंतराल पर हल्का और पौष्टिक आहार लेना चाहिए। लंबे समय तक खाली पेट रहने से कमजोरी, चक्कर और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं। नियमित अंतराल पर भोजन करने से मां और गर्भस्थ शिशु दोनों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है।
:: एडवाइजरी ::
- दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ लें।
- हर तीन घंटे में पौष्टिक आहार अवश्य खाएं।
- मौसमी फल, हरी सब्जियां और घर का ताजा भोजन लें।
- तेज धूप में निकलने से बचें और आवश्यक होने पर छाता या दुपट्टे का प्रयोग करें।
- बाहर का तला-भुना, बासी और खुला खाद्य पदार्थ न खाएं।
- चक्कर, उल्टी, अत्यधिक कमजोरी या पेट दर्द होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
ओपीडी में मरीज को देखतीं डाॅ. विशाखा दीक्षित । स्रोत: डॉक्टर