म्योहर माइनर की बृहस्पतिवार रात पटरी फटने से करीब दस बीघा फसल जलमग्न हो गई। सुबह जानकारी होने पर पहुंचे किसानों ने किसी तरह पटरी बांधी। म्योहर माइनर में 11 दिन पहले पानी छोड़ा गया है। सिंचाई के ऐन वक्त पर माइनर में पानी आया तो किसान अपने-अपने खेतों की सिंचाई में जुट गए। दस दिन तक माइनर चली तो सिंचाई का काम लगभग पूरा हो गया। पानी की खपत कम होते ही म्योहर माइनर पटरी बराबर उफनाने लगी।
बृहस्पतिवार की रात पानी अधिक होने से माइनर की पटरी बड़ा तालाब निवासी सतीश सरोज के खेत के सामने फट गई। रातभर तेजी से पानी जाने के कारण यहां के रतीभान, पतिराम, परान सहित करीब छह किसानों की तकरीबन दस बीघा फसल जलमगभन हो गई। सुबह किसानों को इसकी जानकारी हुई तो वह फावड़ा लेकर पटरी बांधने के लिए दौड़े। कड़ी मशक्कत के बाद किसानों ने पानी के बहाव को रोका। इसी तरह म्योहर निवासी गजेंद्र प्रसाद मिश्र की आम की बाग के सामने पटरी क्षतिग्रस्त होने से बाग सहित आठ बीघा फसल जलमगभन हो गई। किसानों ने एक्सईएन नहर से माइनर में पानी कम करने की मांग की है। वहीं फसलों के जलमग्न होने से हुए नुकसान को लेकर किसानों में आक्रोश है।