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प्रयागराज से कोरोना वायरस लेकर आ रहे सरकारी कर्मचारी!

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जिले में लगातार बढ़ते संक्रमण के मामले में पड़ोसी जनपद प्रयागराज का भी हाथ माना जा रहा है। यहां विभिन्न विभागों में काम करने वाले अधिकारी-कर्मचारी प्रयागराज में अपना ठिकाना बनाए हुए हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने जिस तरह से कोरोना की जांच का दायरा बढ़ाया है, उससे पड़ोसी जिले की अपेक्षा यहां संक्रमितों की संख्या कम है। जिले के तमाम विभागों के विभागाध्यक्ष भी इस बाबत जागरूक हैं। वह अपने यहां नियुक्त लोगों की महीने में कम से कम एक बार जांच जरूर करवा लेते हैं।
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जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों का दायरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। रोजाना यहां एक हजार के करीब एंटीजन किट से जांच होती हैं वहीं चार सौ के करीब स्वाब सैंपल लिए जाते हैं। इन जांच के बीच रोजाना औसत करीब 20 संक्रमित मरीज सामने आ रहे हैं। जिले में अब तक 1088 लोग संक्रमित मिल चुके हैं। इसके पीछे कुछ विभागाध्यक्षों की पहल को सराहनीय माना जा रहा है। जिले में जांच कराने वाले सबसे ज्यादा सरकारी कर्मचारी हैं। इसके अलावा जिन गांवों में संक्रमित मरीज मिलते हैं वहां पर भी उनके संपर्क में आए लोगों व परिवार के सदस्यों की जांच कराई जा रही है। इसी का नतीजा है कि जिले में संक्रमण की रफ्तार अन्य जनपदों की मुकाबले नियंत्रण में हैं।
जिले में कोविड का काम देख रहे डॉ. एस अग्रवाल बताते हैं कि सीएमओ कार्यालय में नियुक्त सभी कर्मचारियों को जांच कराने का निर्देश दिया गया है। इनमें से अब तक पांच लोग संक्रमित मिले हैं। इसी तरह जिला अस्पताल के सीएमएस ने बिना जांच कराने वाले कर्मचारियों के वेतन रोकने का निर्देश दिया। नतीजा रहा है कि वहां भी अब तक 20 के करीब कर्मचारी संक्रमित मिल चुके हैं। डीएम मनीष कुमार वर्मा, पुलिस अधीक्षक अभिनंदन व बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता के अलावा बीएसए ने भी ऐसा ही प्रयास किया। जिसका नतीजा रहा कि इन सभी विभागों से 30 के करीब लोग संक्रमित पाए गए जो इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ हैं। डॉ. एस. अग्रवाल की मानें तो प्रयागराज की स्थिति बेहद खराब है। वहां रोजाना करीब चार सौ के करीब संक्रमित मिल रहे हैं।
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एक तरह से देखा जाए तो शहर के ज्यादातर मोहल्ले में लोग संक्रमित हैं। जिले में ज्यादातर सरकारी विभागों में काम करने वाले कर्मचारी रोजाना प्रयागराज से सफर करते हैं। अब स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अपील की गई है कि बैंक, सरकारी और गैर सरकारी प्रतिष्ठान जिनके यहां लोगों को आवागमन होता है वह लोग खुद पहल करके अपने यहां कार्यरत कर्मचारियों की जांच कराएं। जिससे कि संक्रमण को नियंत्रित किया जा सके।जांच की सुविधा अब ब्लाक स्तर पर भी कर दी गई है। डॉ. एस. अग्रवाल बताते हैं कि जिस गांव में कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित मिलता है उसके परिवार व संपर्क में आए लोगों को आईबरमेक्टिंग नामक दवा का मुफ्त में वितरण किया जा रहा है। माना जा रहा है कि यह दवा करोना के बचाव में काफी कारगर है। इसके अलावा स्वास्थ्य, पुलिस और गांव से जुड़े राजस्व कर्मियों को भी दवा दी जा रही है।
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