fear of infective disease in karari
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करारी कस्बे के दो मोहल्लों में रहने वाले करीब ढाई सौ परिवार संक्रामक बीमारियों के रडार पर हैं। दरअसल, सड़क चौड़ीकरण को किए गए ध्वस्तीकरण के मलबे से यहां नाले-नालियां चोक हो गए हैं। अब लोगों के घरों से निकलने वाला गंदा पानी जगह-जगह पर ठहरा हुआ है। जलनिकासी का इंतजाम नहीं कराए जाने से नागरिकों में नाराजगी है। आलम यही रहा तो किसी भी लोग नगरवासियों का गुस्सा फूट सकता है।
करारी तिराहे से शाहपुर गांव तक सड़क का चौड़ीकरण कराया जा रहा है। चौड़ीकरण की खातिर अतिक्रमण की जद में आने वाला करारी के कृष्ण नगर व इंद्रानगर मोहल्ले के करीब ढाई सौ मकानों का अगला हिस्सा ध्वस्त करा दिया गया है। इसके मलबे से इन दोनों मोहल्लों में नाले-नालियां चोक हो गए हैं।
नगरवासियों का कहना है कि ध्वस्तीकरण का काम पखवाड़े भर पहले करके सार्वजनिक लोक निर्माण विभाग के लोग भाग खड़े हुए हैं। ध्वस्तीकरण के साथ ही सड़क और नाले का निर्माण भी कराया जाना चाहिए था। ऐसा नहीं किए जाने का परिणाम है कि जलनिकासी की व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है। अब गंदा पानी उफनकर सड़कों पर बह रहा है। जगह-जगह पर जलजमाव की स्थिति बनी हुई है। ठहरे हुए गंदे पानी में खतरनाक मच्छर पल रहे हैं। जो कभी भी संक्रामक बीमारियों के फैलने का कारण बन सकते हैं। लोगों ने जिलाधिकारी से चौड़ीकरण का कार्य युद्ध स्तर पर कराने की मांग की है। ताकि नाली और नालों का निर्माण भी कराया जा सके। बीमारियां फैलने की दशा में नगरवासियों ने बेमियादी आंदोलन की चेतावनी भी दी है।